06/07/26

कैथल में 21 लाख की ब्लैकमेलिंग का बड़ा खुलासा: SC-ST केस में समझौता कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश

कैथल, 6 जुलाई (अन्‍नू): हरियाणा के कैथल में पोक्सो (POCSO) और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट का झूठा केस दर्ज करवाकर बाद में समझौता करने के नाम पर 21 लाख रुपये ऐंठने के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस की एंटी व्हीकल थेफ्ट (AVT) स्टाफ टीम द्वारा की गई गहन पूछताछ में वाल्मीकि महापंचायत के कथित राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार सिसला ने अपने उस पूरे गिरोह का राज उगल दिया है, जो प्रदेशभर में लोगों को ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलने का धंधा चला रहा था।

पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सफेदपोशों और सक्रिय सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा सुसंगठित नेटवर्क बनाया हुआ था, जो सीधे तौर पर दर्ज मामलों में मध्यस्थता (समझौता) कराने के नाम पर जबरन वसूली (Extortion) का काम करता था।

पूरे हरियाणा में फैला था जाल; ऐसे काम करता था यह शातिर गिरोह

पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का जो 'मोडस ऑपेरंडी' (काम करने का तरीका) आया है, वह बेहद हैरान करने वाला है:

  • केस दर्ज होते ही मौके पर पहुंचना: गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत था कि हरियाणा के किसी भी कोने में जैसे ही एससी-एसटी या पोक्सो एक्ट के तहत कोई मामला दर्ज होता था, गिरोह के गुर्गे तुरंत एक्टिव होकर पीड़ित पक्ष के पास पहुंच जाते थे।

  • मसीहा बनने का स्वांग रचना: ये आरोपी पीड़ित समाज के लोगों को विश्वास में लेते थे कि वे पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े हैं और उन्हें इंसाफ दिलाएंगे। जबकि असलियत में इनका मकसद सिर्फ और सिर्फ आरोपी पक्ष से पैसे ऐंठना होता था। अगर किसी मामले में पीड़ित पक्ष समझौते के लिए बिल्कुल राजी नहीं होता था, तो ये लोग चुपचाप उस मामले से पीछे हट जाते थे।

  • माफीनामे का नाटक और पैसों का बंदरबांट: जब आरोपी पक्ष कानूनी कार्रवाई के डर से पैसे देने के लिए तैयार हो जाता था, तो यह गिरोह पीड़ित परिवार के सामने आरोपी पक्ष से केवल कागजी माफीनामा इत्यादि करवाने का नाटक रचता था। इसके बाद समझौते के एवज में ली गई मोटी रकम को यह गिरोह आपस में बांट लेता था और पीड़ित परिवार को अंधेरे में ही रखा जाता था।

लिखित शिकायत देने से डर रहे हैं लोग, पुलिस ने की आगे आने की अपील

एवीटी इंचार्ज और मामले के मुख्य जांच अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि इस गिरोह के मुखिया शिवकुमार सिसला की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस के पास मौखिक रूप से और मोबाइल कॉल्स के जरिए कई अन्य पीड़ितों की शिकायतें पहुंच रही हैं। लोग बता रहे हैं कि इस गिरोह ने उन्हें भी अपना शिकार बनाया है।

हालांकि, लोक-लाज या डर के कारण अभी तक कोई भी नया शिकायतकर्ता लिखित रूप में सामने आने को तैयार नहीं हो रहा है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस गिरोह की ब्लैकमेलिंग का शिकार हुआ है, तो वह बिना किसी डर के पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराए, ताकि आरोपियों के खिलाफ और कड़े कानूनी सबूत जुटाए जा सकें।

क्या था पूरा मामला? 25 लाख की मांगी थी रंगदारी

बता दें कि कैथल में एक युवक को साजिश के तहत मनगढ़ंत और झूठे पोक्सो व एससी-एसटी एक्ट के केस में फंसाया गया था। केस दर्ज होने के बाद आरोपियों ने मामले को रफा-दफा करने और कोर्ट से बाहर समझौता करने के लिए ₹25 लाख की भारी-भरकम रंगदारी मांगी थी, जिसमें से 21 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।

जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो पूरा केस झूठा और हनीट्रैप व ब्लैकमेलिंग का निकला। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी शिवकुमार (निवासी गांव सिसला) सहित उसके तीन अन्य साथियों जोगिंद्र (निवासी गांव कौल), करेशन और अशोक को गिरफ्तार कर लिया था।

9 लाख रुपये की रिकवरी, पूछताछ जारी

जांच अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, पुलिस ने रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी के कब्जे से अब तक ₹9 लाख की नकदी बरामद (Recover) कर ली है। आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने इस 21 लाख की रकम में से बाकी पैसे कहाँ छिपाए हैं या किसे दिए हैं। पुलिस का कहना है कि यदि जांच के दौरान इस गिरोह में किसी सरकारी कर्मचारी, दलाल या अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसे भी तुरंत केस में नामजद कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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