घरौंडा में फूड सेफ्टी विभाग का बड़ा एक्शन: जूस, पनीर, मेवे और लस्सी सहित कई सैंपल भरकर चंडीगढ़ लैब भेजे
अभिकान्त, 20 जून, करनाल: मिलावटखोरों के खिलाफ और खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए करनाल के घरौंडा में आज फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने एक बड़ा औचक चेकिंग अभियान चलाया। विभाग की विशेष टीम ने शहर के तीन अलग-अलग प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों पर औचक छापेमारी करते हुए जूस, फल, दूध, पनीर, मेवे और लस्सी के कुल कई सैंपल (नमूने) भरे। इन सभी सैंपलों को सील कर गहन जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित राजकीय प्रयोगशाला (लैब) भेज दिया गया है।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस जांच की आधिकारिक रिपोर्ट आने में करीब तीन सप्ताह (21 दिन) का समय लगेगा और उसी रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी।
सीएम विंडो की शिकायत पर जूस शॉप पर छापा, अन्य दो जगहों पर रूटीन चेकिंग
फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) डॉ. कपिला सैनी के नेतृत्व में सहायक सुरेंद्र कुमार व टीम के अन्य सदस्यों के साथ यह कार्रवाई अमल में लाई गई:
गर्ग जूस शॉप पर पहली कार्रवाई: टीम ने सबसे पहले रेलवे रोड पर स्थित 'गर्ग जूस शॉप' पर औचक दबिश दी। अधिकारियों ने बताया कि इस विशेष दुकान के खिलाफ किसी नागरिक ने मुख्यमंत्री शिकायत निवारण पटल (सीएम विंडो) पर मिलावट की शिकायत दर्ज करवाई थी। टीम ने यहाँ से मौसमी के जूस और केले के सैंपल कलेक्ट किए।
यतिन डेरी से लिए दूध-पनीर के नमूने: इसके बाद टीम विश्वकर्मा-मंडी रोड पर स्थित 'यतिन डेरी' के काउंटर पर पहुंची। यहाँ रूटीन चेकिंग के तहत स्टॉक में रखे दूध और पनीर के सैंपल भरे गए।
ओम स्वीट्स पर भी एक्शन: अंत में टीम ने फ्रूट मंडी के नजदीक स्थित 'ओम स्वीट्स' पर कार्रवाई की। यहाँ से गुणवत्ता की जांच के लिए मेवे और मीठी लस्सी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन दोनों डेरी व मिठाई की दुकानों पर सामान्य रूटीन सैंपलिंग के तहत ही जांच की गई है।
कैसी होगी कार्रवाई? रिपोर्ट की श्रेणियों पर निर्भर करेगा फैसला
एफएसओ डॉ. कपिला सैनी ने आगामी कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया कि चंडीगढ़ लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी:
सब स्टैंडर्ड (कम गुणवत्ता) मिलने पर: यदि प्रयोगशाला की जांच में कोई भी सैंपल फेल या सब स्टैंडर्ड (मानकों से कम) पाया जाता है, तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ एडीसी (ADC) कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा और नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
अनसेफ (असुरक्षित/घातक) मिलने पर: यदि सैंपल में कोई हानिकारक केमिकल या मिलावट पाई जाती है और वह 'अनसेफ' की श्रेणी में आता है, तो संबंधित व्यक्ति या फर्म के खिलाफ सीजेएम (CJM) कोर्ट में सीधे तौर पर आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा, जिसमें जेल की सजा का भी प्रावधान है।
विभाग ने कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी छोटे-बड़े कारोबारी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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