यूपी में रसोई गैस क्रांति: अब घरों में पहुंचेंगे हल्के और सुरक्षित कंपोजिट फाइबर सिलेंडर

जे कुमार 12 फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के इस्तेमाल का अनुभव अब पूरी तरह बदलने वाला है। प्रदेश सरकार और तेल कंपनियों के साझा प्रयासों से अब राज्य में फाइबर से बने कंपोजिट गैस सिलेंडर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। ये आधुनिक सिलेंडर न केवल दिखने में आकर्षक हैं, बल्कि सुरक्षा और सुविधा के मामले में पुराने भारी-भरकम लोहे के सिलेंडरों से कोसों आगे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बुजुर्गों को भारी सिलेंडर उठाने की समस्या से निजात दिलाना और रसोई में होने वाले हादसों पर लगाम लगाना है।

इन फाइबर सिलेंडरों की सबसे बड़ी विशेषता इनका वजन है, जो पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों के मुकाबले लगभग आधा होता है। जहां लोहे का खाली सिलेंडर ही काफी भारी होता है, वहीं कंपोजिट सिलेंडर को आसानी से एक हाथ से उठाया जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से इन्हें 'ब्लास्ट प्रूफ' माना गया है क्योंकि इनमें उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो अत्यधिक तापमान या आग की स्थिति में भी सिलेंडर को फटने नहीं देती। इसके अलावा, ये सिलेंडर पारदर्शी श्रेणी के होते हैं, जिससे उपभोक्ता बाहर से ही देख सकेंगे कि उसमें कितनी गैस बची है। इससे गैस चोरी या कम गैस मिलने की शिकायतों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।

तकनीकी रूप से इन सिलेंडरों को ट्रैकिंग सिस्टम से भी लैस किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता आएगी। उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से शुरू होकर यह योजना जल्द ही पूरे प्रदेश में विस्तार लेगी। सरकार का यह कदम डिजिटल और स्मार्ट किचन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उपभोक्ताओं को इन सिलेंडरों के लिए पुराना कनेक्शन बदलने की सुविधा भी दी जाएगी। कुल मिलाकर, यह नई तकनीक उत्तर प्रदेश के करोड़ों परिवारों के लिए सुरक्षा और बचत का एक नया अध्याय शुरू करने वाली है।

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