03/07/26

कलेसर के सेंचुरी एरिया में तेंदुए की तड़प-तड़प कर मौत: पोस्टमॉर्टम में घातक 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' के लक्षण, हिसार भेजी रिपोर्ट

यमुनानगर, 3 जुलाई (अन्‍नू): हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध कलेसर जंगल के सेंचुरी एरिया से वन्यजीव प्रेमियों को परेशान करने वाली एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ एक नर तेंदुए (लैपर्ड) ने बीमारी के चलते तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। डॉक्टरों द्वारा किए गए पोस्टमॉर्टम के दौरान मृत तेंदुए के शरीर में बेहद घातक 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' (Canine Distemper Virus - CDV) के गंभीर लक्षण पाए गए हैं। यह जानलेवा बीमारी आमतौर पर संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने से वन्यजीवों में फैलती है।

इस घटना ने वन्य जीव विभाग (Wildlife Department) की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि कलेसर नेशनल पार्क और सेंचुरी एरिया में तेंदुओं की सुरक्षा को लेकर अब बड़ा खतरा मंडराने लगा है।

ग्रामीणों की सूचना पर हरकत में आया विभाग; गश्ती दल पर उठे सवाल

कलेसर जंगल के सेंचुरी एरिया से सटे गांव शहजाद वाला के कुछ ग्रामीणों ने जंगल के एक कोने में इस तेंदुए को बेसुध और तड़पते हुए देखा था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तुरंत वन्य जीव विभाग के अधिकारियों को दी। गंभीर हालत में मिले इस तेंदुए को जब तक इलाज के लिए पशु चिकित्सकों के पास ले जाया जाता, तब तक उसने दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि वन्य जीव विभाग का गश्ती दल (पेट्रोलिंग टीम) पिछले कई दिनों से इस संवेदनशील इलाके में चेकिंग करने नहीं आया था, जिसके कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि यह तेंदुआ कई दिनों से इसी तरह अकेला तड़प रहा था।

तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम; अंदरूनी अंग बुरी तरह डैमेज

तेंदुए की मौत के बाद तीन वरिष्ठ पशु चिकित्सकों—डॉ. राहुल (छछरौली), डॉ. विक्रांत (साढौरा) व डॉ. प्रशांत तिवारी के विशेष पैनल ने शव का पोस्टमॉर्टम किया।

  • क्या आया रिपोर्ट में: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि तेंदुए का लीवर और हार्ट (दिल) इस खतरनाक बीमारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे।

  • अंदरूनी ब्लीडिंग: लैपर्ड की आंतों में अंदरूनी ब्लीडिंग (रक्तस्राव) हो रहा था और उसकी सांस की नली में भी कई गंभीर विकार (इन्फेक्शन) पाए गए।

पशुपालन विभाग के डॉ. सतीश धनिया ने बताया कि मृत तेंदुआ नर था और उसकी अनुमानित उम्र महज 8 से 10 महीने के आसपास थी। नियमों का पालन करते हुए बनसंतूर हाथी पुनर्वास केंद्र के परिसर में तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार (जलाने) के बाद उसके अवशेषों को जमीन में सुरक्षित दफना दिया गया है।

पुष्टि के लिए हिसार लैब भेजा बिसरा; आमतौर पर खुद को आइसोलेट कर लेते हैं जानवर

पैनल के डॉक्टरों ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह पूरी तरह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के ही लक्षण हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए तेंदुए के बिसरा (Visceral Samples) को जांच के लिए हिसार स्थित लैब में भेजा जा रहा है। इससे समय रहते बीमारी की सटीक पुष्टि हो सकेगी और जंगल के अन्य तेंदुओं व बाकी वन्यजीवों को इस महामारी के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

वहीं, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सतबीर नैन ने राहत की बात बताते हुए कहा कि आमतौर पर जब भी कोई लैपर्ड या जंगली जानवर इस तरह की संक्रामक बीमारी से ग्रसित होता है, तो वह खुद को झुंड या इलाके से अलग-थलग (Self-Isolate) कर लेता है। वह अकेला रहना पसंद करता है, जिससे इस वायरस के अन्य तेंदुओं के समूह में फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

आबादी क्षेत्र में भी देखा गया बीमार तेंदुआ, रामपुर खादर में किसान ने बनाया वीडियो

वन्य जीव विभाग की चिंता इस वजह से और ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि बुधवार (1 जुलाई) की रात करीब 8 बजे कलेसर नेशनल पार्क से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव रामपुर में किसान ब्रह्मपाल के पापुलर के खेत में भी एक लैपर्ड देखा गया था। यह लैपर्ड बाद में ट्यूबवेल के कमरे की छत पर बैठा नजर आया, जिसका वीडियो किसान ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया था।

ग्रामीणों के मुताबिक, आबादी क्षेत्र में घुसा यह लैपर्ड काफी उम्रदराज या गंभीर रूप से बीमार लग रहा था, क्योंकि उसकी चाल बहुत सुस्त थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी या कमजोरी के कारण वह फुर्तीले जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर पा रहा होगा, इसी वजह से वह आसान शिकार या भोजन की तलाश में इंसानी आबादी वाले क्षेत्र का रुख कर रहा है।

25 हजार एकड़ में फैला है कलेसर का कॉरिडोर

करीब 25 हजार एकड़ क्षेत्र में फैले कलेसर नेशनल पार्क और सेंचुरी एरिया में मौजूदा समय में करीब 50 तेंदुओं के होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि करीब 3 साल पहले सरकार ने हरियाणा विधानसभा में यह संख्या 23 बताई थी।

कलेसर नेशनल पार्क की सीमाएं चार राज्यों—हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश (UP) से लगती हैं। यहाँ तीन बड़े नेशनल पार्क आपस में जुड़े हुए हैं, जिनमें कलेसर के साथ हिमाचल प्रदेश का कर्नल शेर जंग (सिंबलबाड़ा) नेशनल पार्क और उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क शामिल हैं। बहराल के पास एक विशेष वन्यजीव कॉरिडोर भी बना हुआ है, जिसका इस्तेमाल करके इन तीनों नेशनल पार्कों के जंगली जानवर और तेंदुए लगातार एक राज्य से दूसरे राज्य में मूवमेंट (आवाजाही) करते हैं। ऐसे में वायरस का खतरा अन्य राज्यों के जंगलों के लिए भी चिंता का विषय है।

#YamunanagarNews #KalesarNational Park #LeopardDeath #CanineDistemperVirus #WildlifeAlert #KalesarWildlife #HaryanaForest #LeopardSickness #HisarLab #BreakingNews #DanikKhabar

Previous

नारनौल के बायो फ्यूल कारोबारियों से 9.30 लाख की ठगी: चरखी दादरी और भिवानी के व्यापारियों ने माल लेकर नहीं दिया भुगतान

Next

ऐतिहासिक शुरुआत: आंध्र प्रदेश से 'वीबी– जी राम जी योजना' का राष्ट्रव्यापी आगाज़!