जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से गांव अहरवां में लगाया कानूनी जागरूकता शिविर
जे कुमार पलवल, 5 अगस्त : जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं डीएलएसए पलवल के चेयरमेन प्रमोद गोयल के मार्गदर्शन तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव मेनका सिंह के नेतृत्व में सोमवार को गांव अहरवां में कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन पैनल अधिवक्ता हंसराज शांडिल्य और पीएलवी नरेंद्र तथा शक्ति वाहिनी एनजीओ द्वारा आयोजित किया गया।
मुख्य कानूनी जागरूकता शिविर में पैनल अधिवक्ता ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम-2007 के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि यह सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है जो वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के भरण-पोषण और कल्याण के लिए बनाया गया है। जो व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र को पूर्ण कर लेता है या उससे अधिक है वे सभी सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आ जाते हैं। जो अपनी आय या संपत्ति से अपना भरण-पोषण या अपना गुजारा व स्वास्थ्य संबंधी चिकित्सा करने में असमर्थ हैं, वह अपने बच्चों या सौतेले बच्चे, गोद लिए बच्चे, लीगल गार्जियन अथवा वह व्यक्ति जो वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति पर काबिज है से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार देता है। इसमें आवास, कपड़ा और सुरक्षा तथा वरिष्ठ नागरिकों या माता-पिता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी सुविधाओं के प्रावधान है। इसके अलावा किसी वरिष्ठ नागरिक को अपनी संपत्ति को वापस लेने का भी अधिकार दिया गया है, जो संपत्ति उसने अपने पुत्रों, पुत्री या अन्य किसी वारिस को ट्रांसफर कर दी है।
वरिष्ठ नागरिक को यह भी हक है कि वह अपने वारिस तथा उस संबंधित व्यक्ति जिसे अपनी प्रॉपर्टी ट्रांसफर की है के खिलाफ अधीनस्थ थाने में शिकायत दर्ज कर सकता है। पुलिस द्वारा वरिष्ठ नागरिक द्वारा दी गई दरखास्त को प्राथमिकता दी जाएगी और 15 दिन के अंदर कार्यवाही की जाएगी। एनजीओ शक्ति वाहिनी के साहिल ने बाल विवाह अधिनियम-2006 के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि 18 साल से कम उम्र की लडक़ी और 21 साल से छोटे लडक़े की शादी करना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।
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