कुरुक्षेत्र: संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में महाकाल की तर्ज पर शुरू हुई फ्री ऑनलाइन पूजा बुकिंग; 1 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन
पेहोवा/कुरुक्षेत्र, 30 जुलाई (अन्नू): हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पेहोवा स्थित ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर (अरुणाय) ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक अनूठी पहल की है। मंदिर प्रबंधन ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तर्ज पर निशुल्क ऑनलाइन पूजा बुकिंग सेवा शुरू की है।
मंदिर प्रबंधन का दावा है कि श्रद्धालुओं को बिना शुल्क ऑनलाइन पूजा बुकिंग की सुविधा देने वाला यह हरियाणा का पहला मंदिर है।
श्रावण मास से पहले ही 1 लाख से ज्यादा बुकिंग, 20 दिन की वेटिंग
गुरुवार से शुरू हो रहे पावन श्रावण मास से पहले ही इस सुविधा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है:
1 लाख से अधिक पंजीकरण: सुविधा शुरू होते ही 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु ऑनलाइन पूजा के लिए स्लॉट बुक करा चुके हैं।
20 दिन की वेटिंग: भारी मांग के कारण अब पूजा बुकिंग के लिए 20 दिन से ज्यादा का वेटिंग पीरियड चल रहा है।
बिना लाइन के पूजा: नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु अपनी तय बुकिंग समय से करीब दो घंटे पहले मंदिर पहुँचकर बिना लंबी लाइनों में लगे सीधे पूजा अर्चना कर सकेंगे। हालाँकि, इस दौरान अन्य श्रद्धालु भी सामान्य रूप से जल चढ़ा सकेंगे।
चार प्रमुख पूजाओं की ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध
संगमेश्वर सेवा दल के प्रधान भूषण गौतम ने बताया कि मंदिर में फिलहाल 4 प्रकार की पूजा की ऑनलाइन बुकिंग जारी है:
बेलपत्र पूजा
श्रृंगार पूजा
रुद्राभिषेक पूजा
अखंड रुद्राभिषेक पूजा
ये सभी पूजाएं मंदिर के अधिकृत पुजारियों द्वारा ही संपन्न कराई जाएंगी। वहीं, कालसर्प दोष पूजा विशेष रूप से नागपंचमी के दिन होगी, जिसकी बुकिंग मंदिर के पंडित स्वयं करते हैं। इसके अलावा मंदिर के वार्षिक भंडारे की बुकिंग वर्ष 2027 तक के लिए पहले ही पूरी हो चुकी है।
13 अगस्त को स्थापित होंगे देश के 12 ज्योतिर्लिंग
मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 13 अगस्त को मंदिर परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की जाएगी। ये सभी ज्योतिर्लिंग देश के मूल 12 ज्योतिर्लिंगों के पवित्र स्पर्श से जुड़े हुए हैं और इनका स्वरूप व आकार भी मूल स्वरूप जैसा ही होगा।
घर बैठे ऐसे करें ऑनलाइन पूजा की बुकिंग:
स्टेप 1: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट www.sangameshwardham.com पर जाएँ या मंदिर के क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करें।
स्टेप 2: वेबसाइट पर Menu में जाकर Home पर क्लिक करें।
स्टेप 3: "श्रावण मास प्रतिदिन अभिषेक और पूजा के लिए यहां क्लिक करें" विकल्प को चुनें।
स्टेप 4: खुले हुए डिजिटल फॉर्म में अपना नाम, मोबाइल नंबर, पता और अपनी पसंद के पंडित का नाम (सूची अनुसार) सिलेक्ट करें।
स्टेप 5: पूजा की तिथि और समय का चयन कर सबमिट करें। रजिस्ट्रेशन होते ही हरा बटन एक्टिव हो जाएगा और बुकिंग का अपडेट मोबाइल पर मिल जाएगा।
संगमेश्वर धाम का इतिहास और अनोखी मान्यताएं
दिव्य शिवलिंग का प्राकट्य: मान्यतानुसार प्राचीन काल में महात्मा गणेश गिरि को झाड़ियों और दीमक के ढेर के बीच यह दिव्य शिवलिंग मिला था। जब उन्होंने इसे दूसरी जगह स्थापित करना चाहा तो शिवलिंग का अंत नहीं मिला। उसी रात भगवान शिव ने स्वप्न में वहीं मंदिर बनाने का निर्देश दिया। वर्ष 1946 में महंत गिरधर नारायण पुरी और बाबा शरण पुरी के प्रयासों से वर्तमान मंदिर बना।
त्रेतायुग से नाता: कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय पाने से पहले यहाँ बालू मिट्टी से Parthiv (पार्थेश्वर) शिवलिंग बनाकर पूजा की थी।
अनोखे चमत्कार: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर में दूध बिलोने पर मक्खन नहीं निकलता (दूध खराब हो जाता है)। इसके अलावा परिसर में खाट/चारपाई का उपयोग नहीं होता।
प्रबंधन: मंदिर का संचालन और संपूर्ण व्यवस्था श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी और मंदिर सचिव महंत विश्वनाथ गिरी की देखरेख में किया जाता है।
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