कुरुक्षेत्र: खेतों के पास ड्रेन में घुसा 6 फुट लंबा मगरमच्छ, आधे घंटे के रेस्क्यू के बाद पकड़ा; भौर सैंदा प्रजनन केंद्र में छोड़ा
कुरुक्षेत्र, 17 जुलाई (अन्नू): कुरुक्षेत्र जिले के नरकातरी गांव के पास से गुजरने वाली ड्रेन से एक 6 फुट लंबे विशालकाय मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का मामला सामने आया है। पिछले 4 दिनों से खेतों के पास ड्रेन में इस मगरमच्छ के दिखाई देने से आसपास के किसानों और ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल था। बीती शाम गोताखोर प्रगट सिंह और वन्य प्राणी विभाग की टीम ने करीब आधे घंटे के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद इसे सुरक्षित काबू कर लिया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
सरपंच की सूचना पर पहुंची गोताखोरों की टीम
प्रसिद्ध गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि उन्हें नरकातरी गांव के सरपंच अनिल कुमार ने खेतों के पास मगरमच्छ होने की सूचना दी थी। शुरुआत में उन्हें इतनी आबादी वाले इलाके में मगरमच्छ होने पर थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन जब सरपंच ने उन्हें मगरमच्छ की लाइव फोटो भेजी, तो वे तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर रवाना हो गए।
वन्य प्राणी विभाग ने भौर सैंदा मगरमच्छ प्रजनन केंद्र में छोड़ा
रेस्क्यू के दौरान वन्य प्राणी विभाग को भी सूचित किया गया, जिसके बाद विभाग के कर्मचारी कृष्ण और बलराम तुरंत टीम के साथ मौके पर पहुंचे। मगरमच्छ चूंकि आबादी और खेतों के बिल्कुल नजदीक था, इसलिए बेहद सावधानी बरतते हुए करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया। इसके बाद विभाग की टीम उसे अपने साथ ले गई और कुरुक्षेत्र के भौर सैंदा गांव में स्थित प्रसिद्ध मगरमच्छ प्रजनन केंद्र में सुरक्षित छोड़ दिया।
4 दिन से खेतों में जाने से घबरा रहे थे किसान
गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि यह मगरमच्छ पिछले 4 दिनों से लगातार ड्रेन में चहलकदमी करता दिखाई दे रहा था। इसके खौफ के कारण खेतों में काम करने वाले किसानों ने अकेले खेतों में जाना तक बंद कर दिया था। समय रहते मगरमच्छ के पकड़े जाने से एक बड़ा संभावित हादसा टल गया है।
एसवाईएल (SYL) नहर में भी पहले दिख चुके हैं मगरमच्छ
ग्रामीणों के अनुसार, कुरुक्षेत्र के इस क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पास से गुजरने वाली सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर में कई बार 10 से 12 फुट लंबे मगरमच्छ देखे जा चुके हैं, जो अक्सर जलभराव या ड्रेन के रास्ते खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ रुख कर लेते हैं।
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