ज्ञान भारतम् मिशन: प्राचीन धरोहर को सहेजने में जुटा कैथल प्रशासन, 10 जून तक पांडुलिपियों का सर्वे पूरा करने के निर्देश
कैथल, 26 मई (अन्नू): कैथल जिला प्रशासन ने भारत की समृद्ध प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए अपनी कमर कस ली है। हरियाणा सरकार के महत्वाकांक्षी 'ज्ञान भारतम् मिशन' के अंतर्गत जिले में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लघु सचिवालय के वीडियो कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त (DC) अपराजिता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस सर्वेक्षण कार्य को आगामी 10 जून 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इस बैठक से ठीक पहले हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी उपायुक्तों से इस कार्य का फीडबैक लिया और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए।
75 वर्ष पुराने अभिलेखों और पांडुलिपियों का होगा डिजिटलाइजेशन; मूल मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड
डीसी अपराजिता ने 'ज्ञान भारतम् मिशन' के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक अभियान का मूल उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों और ज्ञान परंपरा को न केवल सुरक्षित रखना है, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनका डिजिटलाइजेशन करके आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
इस अभियान की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
75 वर्ष पुराने रिकॉर्ड की खोज: जिले के धार्मिक स्थलों, मंदिरों, गुरुद्वारों, शैक्षणिक संस्थानों, प्राचीन पुस्तकालयों के साथ-साथ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आम जनता के पास मौजूद 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान की जा रही है।
पोर्टल पर अपलोडिंग: पहचान किए गए सभी दस्तावेजों का पूरा विवरण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर 'ज्ञान भारतम् मिशन' पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। कैथल जिले ने इस दिशा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अब तक 387 पांडुलिपियों का डेटा पोर्टल पर दर्ज कर लिया है।
मालिकों के पास ही रहेगा मूल दस्तावेज: उपायुक्त ने आम जनता का भ्रम दूर करते हुए स्पष्ट किया कि जिन भी नागरिकों या संस्थाओं के पास ये प्राचीन पांडुलिपियां या ग्रंथ उपलब्ध हैं, वे उन्हीं के पास पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। सरकार केवल उनकी ऐतिहासिक प्रासंगिकता का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रही है और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने में तकनीकी सहयोग देगी।
एडीसी सुशील कुमार बने जिला नोडल अधिकारी; सभी एसडीएम संभालेंगे अपने क्षेत्रों कमान
इस राष्ट्रव्यापी महत्व के कार्य को पारदर्शिता और सटीकता के साथ पूरा करने के लिए जिला स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। डीसी अपराजिता ने बताया कि अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) सुशील कुमार को इस पूरी जिला स्तरीय समिति का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, जिले के सभी उपमंडलाधीश (SDM) अपने-अपने क्षेत्रों (सब-डिवीजन) में नोडल अधिकारी के रूप में मोर्चा संभालेंगे।
सभी एसडीएम को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों और शहरों में पांडुलिपियों का जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन), मैपिंग और डेटा संग्रहण का काम समय रहते सुनिश्चित करें। उपायुक्त ने जिले के बुद्धिजीवियों, इतिहासकारों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के इस पुनीत कार्य में प्रशासन का बढ़-चढ़कर सहयोग करें।
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