हरियाणा में भीषण गर्मी की आहट: पश्चिमी जिलों में लू का अलर्ट और किसानों के लिए चेतावनी

हरियाणा/मौसम, 14 मई (अन्‍नू): हरियाणा में मौसम अब अपने कड़े तेवर दिखाने लगा है। बीते 24 घंटों के भीतर प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है। यद्यपि वर्तमान में पारा सामान्य के आसपास बना हुआ है, लेकिन मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी तीन दिनों में गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ने वाला है। विशेष रूप से 17 मई से राज्य के पश्चिमी इलाकों में भीषण लू (हीट वेव) चलने की आशंका है, जिसे देखते हुए विभाग ने 'यलो अलर्ट' जारी कर दिया है। वर्तमान में सिरसा 44.0°C के साथ राज्य का सबसे तप्त शहर बना हुआ है, जबकि नारनौल, हिसार, रोहतक और महेंद्रगढ़ में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर चुका है।


अस्थिर मौसम और आंधी-बारिश का दौर

तापमान में बढ़ोतरी के बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज काफी अनिश्चित बना हुआ है। सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी दी गई है, वहीं यमुनानगर के रादौर में हाल ही में आए तूफान ने काफी नुकसान पहुँचाया है, जिससे कई गांवों की बिजली सेवा बाधित हुई है। हाल के दिनों में बहादुरगढ़ में ओलावृष्टि दर्ज की गई, जबकि जींद, अम्बाला, पानीपत और करनाल सहित कई अन्य जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखा गया। इस प्रकार, एक ओर जहां सूरज की तपिश बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां भी जारी हैं।



रातों की ठंडक और भविष्य का अनुमान

दिन की चिलचिलाती धूप के उलट प्रदेश में रातें अभी भी अपेक्षाकृत आरामदायक बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में 0.9 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है, जिससे लोगों को रात के समय गर्मी से थोड़ी राहत मिल रही है। रोहतक में न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी कम है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे दिन के तापमान में वृद्धि होगी, आगामी दिनों में रात के समय होने वाली इस ठंडक में भी कमी आएगी और रातें भी गर्म होने लगेंगी।


कृषकों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

मौसम की इस लुका-छिपी को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। आगामी तीन दिनों तक संभावित बारिश और तेज हवाओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कपास की बिजाई रोकने की सलाह दी गई है। जिन किसानों की रबी फसलें जैसे गेहूं या जौ तैयार हैं, उन्हें तत्काल कटाई और थ्रेसिंग का कार्य पूरा करने को कहा गया है। साथ ही, तेज हवाओं से भूसे को बचाने के लिए उसे सुरक्षित ढंग से ढकने और फसलों में सिंचाई को कुछ समय के लिए स्थगित करने का सुझाव दिया गया है। पशुपालकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं को सुरक्षित शेड में रखें और कीटों से बचाव का उचित प्रबंध करें।



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