25/05/26

जलंधर के गुरिंदर वीर सिंह ने रचा इतिहास: 10.09 सेकंड में 100 मीटर रेस जीतकर तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

जलंधर, 25 मई (अन्‍नू): पंजाब के जलंधर के रहने वाले रफ्तार के सौदागर गुरिंदर वीर सिंह ने रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में भारतीय एथलेटिक्स का एक नया इतिहास लिख दिया है। गुरिंदर वीर ने ट्रैक पर बिजली जैसी तेजी दिखाते हुए 100 मीटर की फर्राटा दौड़ को मात्र 10.09 सेकंड में पूरा कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National Record) अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही गुरिंदर वीर ने आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) के लिए भी अपना क्वालिफिकेशन पक्का कर लिया है। रेस जीतने के तुरंत बाद गुरिंदर ने अपनी छाती पर लगे चेस्ट नंबर की तरफ इशारा किया, जिसके पीछे उन्होंने फाइनल रेस से पहले ही अपना लक्ष्य '10.10 सेकंड' और एक दमदार संदेश लिख रखा था— "रुको, मैं अब भी खड़ा हूं।"

मां को किया पहला फोन और पूछा 'मम्मा देखी रेस?', दादी ने पोते की सफलता पर बांटे लड्डू

गुरिंदर वीर की इस अविश्वसनीय उपलब्धि के बाद जलंधर में उनके घर पर जश्न और दीपावली जैसा माहौल बन गया है। जीत की खबर मिलते ही आस-पड़ोस और खेल जगत से जुड़े लोगों की भारी भीड़ उनके घर के बाहर बधाई देने के लिए जमा हो गई। करीब 90 साल की बुजुर्ग दादी ने खुद अपने हाथों से लड्डू खाकर और परिवार को खिलाकर अपने पोते को आशीर्वाद दिया।

गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने भावुक होते हुए बताया कि रेस जीतने के तुरंत बाद गुरिंदर ने पहला फोन उन्हें किया और पूछा, "मम्मी, मेरी रेस देखी?" मां ने कहा, "हां बेटा, तूने आज कमाल कर दिया और हमारा सीना चौड़ा कर दिया।" मां ने बताया कि गुरिंदर अपनी प्रेक्टिस को लेकर इतना जुनूनी है कि वह रोजाना 8-8 घंटे मैदान पर पसीना बहाता था और कई बार तो घर पर बात करने तक का समय उसे नहीं मिलता था। उसने इस मुकाम के लिए अपने शरीर को बहुत तोड़ा है, और उन्हें पूरा विश्वास है कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश के लिए गोल्ड मेडल जरूर जीतेगा।

'डेडी दस्स फेर किदां...': पिता का सपना किया पूरा, 12 साल की उम्र से भाग रहे हैं गुरिंदर

गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि पिता-पुत्र के बीच का रिश्ता बेहद दोस्ताना है। लगातार फोन बिजी आने के बाद जब गुरिंदर की बात अपने पिता से हुई, तो उसने अपनी चुलबुली पंजाबी भाषा में कहा, "डेडी दस्स फेर किदां... (अब बताओ पिता जी, कैसा लगा)?" कमलजीत सिंह ने बताया कि वह खुद भी वॉलीबॉल के खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन किन्हीं कारणों से वह खेल की दुनिया में बहुत ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पाए थे। इसी वजह से उनका सपना था कि उनका बेटा स्पोर्ट्स में देश का नाम रोशन करे। गुरिंदर महज 12 साल की उम्र से ही अपने पिता के साथ सुबह दौड़ने जाता था और इतनी छोटी उम्र में ही वह दौड़ते समय अपने पिता को भी पीछे छोड़ देता था। बेटे की इसी असाधारण प्रतिभा और रफ्तार को देखकर पिता ने उसे एथलेटिक्स में आगे बढ़ाया, जिसने आज भारतीय इतिहास बदल दिया। (बता दें कि 100 मीटर दौड़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड 9.58 सेकंड के साथ जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम दर्ज है)।

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