राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष को सामूहिक उपनयन यज्ञोपवीत संस्कार कार्यशाला का आमन्त्रण और शेखावाटी सन्मार्ग भेंट
एन.एस. बाछल, 21 मई, जयपुर।
राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को मंगलवार को विधान सभा में ब्रह्मलीन आचार्य पंडित नटवरलाल जोशी की स्मृति समिति की ओर से श्री अपूर्व जोशी ने सामूहिक उपनयन यज्ञोपवीत संस्कार अनुष्ठान और उपनयन संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला का आमंत्रण पत्र और लक्ष्मणगढ से प्रकाशित शेखावाटी सन्मार्ग पाक्षिक समाचार पत्र की प्रति भेंट की।
विधान सभा अध्यक्ष देवनानी ने समारोह के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में गुरू शिष्य परम्परा के तहत उपनयन संस्कार सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। शेखावाटी जनपद में विगत 8 दशकों से वैदिक संस्कृति से सम्बोधित विभिन्न उपक्रमों को अनवरत जारी रखने वाले सनातन परम्परा के विद्वान आचार्य स्व. नटवर लाल जोशी भारत के प्रमुख व्यक्तित्व रहे है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अन्तर्गत केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली और ब्रह्मलीन आचार्य पण्डित श्री नटवर लाल जोशी स्मृति संस्था संयुक्त तत्वावधान में हो रहे कार्यक्रम में राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी को 28 मई को प्रथम दिन भारतीय परम्परा में गुरू शिष्य परम्परा अंतर्गत उपनयन संस्कार पर मुख्य व्याख्यान देने और आयोजित कार्यशाला का उद्धाटन करने का अनुरोध किया गया है।
आर्मी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने देखी विधान सभा- राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के आव्हान पर मंगलवार को विधान सभा के सदन, भवन और राजनैतिक आख्यान संग्रहालय को जयपुर के आर्मी पब्लिक स्कूल के नवीं से बारहवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने देखा। आर्मी स्कूल के बच्चों ने राजनैतिक आख्यान संग्रहालय राजस्थान राज्य के गौरवमयी इतिहास, भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में राजस्थान की भूमिका और राजस्थान निर्माण के पदसोपानों को डिजिटल माध्यम से समझा। संग्रहालय में रियासतों का विलय, विधानसभा के विकास, सभी मुख्यमंत्रियों की उपलब्धियां, सभी विधानसभाध्यक्षों का विवरण और राज्य को आकार देने में निर्वहन की गई भूमिका को भी छात्र-छात्राओं ने चलचित्रों के माध्यम से जाना। संग्रहालय में प्रदर्शित निर्वाचन प्रणाली, मंत्री मण्डल एवं बजट की कार्यप्रणाली को भी बच्चों ने देखा। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर प्रदेश के छात्र-छात्राओं और आमजन को जनदर्शन कार्यक्रम के द्वारा संग्रहालय से जोडने का महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया गया है।