कांग्रेस में बढ़ी रार: सज्जन कुमार पर टिप्पणी को लेकर पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने की दीपेंद्र हुड्डा को CWC से हटाने की मांग
बयान से सिख समुदाय में नाराजगी और पुराने घाव फिर हरे हुए: कुलदीप शर्मा
चंडीगढ़, 23 अगस्त - प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी सामने आ रही है, अब सांसद दीपेंद्र हुड्डा द्वारा दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लेकर दिए गए कथित बयान के बाद पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है। वहीं हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से बाहर करने की मांग की है। शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि सज्जन कुमार को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने वाले बयान से सिख समुदाय में रोष पैदा हुआ है जोकि कांग्रेस के लिए विपदा पैदा कर सकता है।
कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा कि दीपेंद्र हुड्डा के बयान के बाद भारत के सिख समुदाय में चिंता और नाराजगी की स्थिति बनी है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा और पंजाब के कुछ सिख मित्रों ने उनसे संपर्क कर इस बयान को लेकर अपना असंतोष व्यक्त किया है। शर्मा के अनुसार, ऐसे समय में जब पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता की ओर से दिया गया विवादित बयान कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
दिवंगत सज्जन कुमार का नाम वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों के कारण लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। कांग्रेस ने समय-समय पर उनसे राजनीतिक दूरी बनाने का रुख अपनाया है। ऐसे में दीपेंद्र हुड्डा द्वारा सज्जन कुमार के बारे में सकारात्मक टिप्पणी किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
कुलदीप शर्मा ने अपने पत्र में इसी संवेदनशीलता को आधार बनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी पहले ही सज्जन कुमार से पूरी तरह अपना संबंध समाप्त कर चुकी है। ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख नेता द्वारा उनके गुणों की प्रशंसा किए जाने से कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठ सकते हैं।
शर्मा ने अपने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया कि इस बयान से सिख समुदाय के पुराने घाव दोबारा खुल गए हैं। उनका मानना है कि इस तरह की टिप्पणी का असर केवल हरियाणा या पंजाब की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय तक भी पहुंच सकता है।
दीपेंद्र हुड्डा को हटाने की मांग
कुलदीप शर्मा के पत्र का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से बाहर करने की मांग है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा है कि पार्टी की गंभीरता और अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
शर्मा का तर्क है कि इस तरह की अपरिपक्व और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी कमजोर हुई है। खासतौर पर उस समुदाय के बीच पार्टी की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिसकी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब कांग्रेस विभिन्न राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी है। पंजाब का चुनावी समीकरण कांग्रेस के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी के किसी प्रमुख नेता की टिप्पणी विपक्ष को कांग्रेस पर हमला करने का अवसर दे सकती है।
कुलदीप शर्मा ने अपने पत्र में किसान आंदोलन के बाद कांग्रेस को सिख समुदाय से मिले समर्थन का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद देशभर में सिख समुदाय के एक बड़े हिस्से ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था।
उनके मुताबिक, दीपेंद्र हुड्डा के बयान के बाद समुदाय के कुछ वर्गों में कांग्रेस के समर्थन को लेकर पुनर्विचार की स्थिति बन रही है। हालांकि यह कुलदीप शर्मा का राजनीतिक आकलन है, लेकिन उनका पत्र यह संकेत जरूर देता है कि पार्टी के भीतर कुछ नेता इस बयान के संभावित चुनावी प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।
शर्मा ने यह भी कहा है कि विपक्षी राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने राजनीतिक लाभ के लिए उठा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनौती केवल पार्टी के भीतर पैदा हुए विवाद को शांत करने की नहीं है, बल्कि विपक्ष के हमले का राजनीतिक जवाब देने की भी है।
पंजाब चुनाव से पहले बयान ने बढ़ाई चिंता
कुलदीप शर्मा ने दीपेंद्र हुड्डा के बयान के समय को भी महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने विशेष रूप से पंजाब विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी माहौल से पहले इस प्रकार की टिप्पणी कांग्रेस के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
पंजाब में राजनीतिक समीकरणों में सिख मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने यह सवाल खड़ा हो सकता है कि पार्टी इस विवाद को किस प्रकार संभालती है। यदि कांग्रेस नेतृत्व दीपेंद्र हुड्डा के बयान से खुद को अलग करता है तो पार्टी को अपने परंपरागत राजनीतिक आधार को स्पष्ट संदेश देने का अवसर मिल सकता है। वहीं यदि पार्टी नेतृत्व इस मामले पर चुप रहता है तो विपक्ष इसे कांग्रेस की नीति और नेतृत्व की कमजोरी के रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
हरियाणा कांग्रेस में भी संदेश देने की कोशिश?
कुलदीप शर्मा का यह पत्र केवल पंजाब की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा सकता। हरियाणा की राजनीति में दीपेंद्र हुड्डा एक प्रमुख कांग्रेस नेता और सांसद हैं। ऐसे में उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति से हटाने की मांग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक प्रभाव को लेकर विभिन्न स्तरों पर खींचतान की चर्चा होती रही है। ऐसे में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा की ओर से सीधे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना पार्टी के भीतर एक नए राजनीतिक विमर्श को जन्म दे सकता है।
हालांकि पत्र का तत्काल प्रभाव संगठनात्मक स्तर पर क्या होगा, यह कांग्रेस नेतृत्व के रुख पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस पत्र ने दीपेंद्र हुड्डा से जुड़े विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ उसे दीपेंद्र हुड्डा के बयान को लेकर उठे राजनीतिक विवाद का समाधान करना होगा, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतोष और सार्वजनिक रूप से उठ रही कार्रवाई की मांग को भी संभालना होगा।
कुलदीप शर्मा ने अपने पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष से यह कदम उठाने की अपील की है कि इससे पार्टी की नीयत और गंभीरता का संदेश जाएगा तथा सिख समुदाय के बीच पैदा हुई नाराजगी को कम करने में मदद मिलेगी।
अब निगाहें कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर हैं कि वह इस पत्र को किस गंभीरता से लेता है और दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर उसका आधिकारिक रुख क्या सामने आता है। यदि पार्टी नेतृत्व इस मामले में कोई कार्रवाई करता है तो इसका सीधा राजनीतिक संदेश पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में जाएगा। वहीं यदि पार्टी इसे व्यक्तिगत बयान बताकर मामले को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करती है, तब भी विपक्ष के हमलों और सिख समुदाय में उठे सवालों का जवाब देना कांग्रेस के लिए चुनौती बना रहेगा।
फिलहाल, सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र हुड्डा की टिप्पणी ने कांग्रेस के भीतर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा का राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा पत्र इस विवाद को और गंभीर राजनीतिक आयाम दे रहा है। पंजाब चुनाव की आहट के बीच यह मामला कांग्रेस के लिए कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है, यह आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति से तय होगा।
पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने पत्र में यह लिखा
आदरणीय कांग्रेस अध्यक्ष जी,
कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य श्री दीपेंद्र हुड्डा द्वारा दिवंगत श्री सज्जन कुमार के गुणों की प्रशंसा करते हुए उन्हें आदर्श व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किए जाने वाले बयान के बाद भारत के सिख समुदाय में गहरी चिंता और आक्रोश देखने को मिला है। हरियाणा और पंजाब के मेरे कुछ सिख मित्रों ने मुझे फोन कर इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि किसान आंदोलन के बाद देशभर में सिख समुदाय ने बड़ी संख्या में कांग्रेस पार्टी के पक्ष में मतदान किया था। लेकिन इस तरह के बयान के बाद समुदाय के बीच कांग्रेस को समर्थन देने को लेकर पुनर्विचार की स्थिति पैदा हो रही है। विपक्षी दल भी राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले श्री दीपेंद्र हुड्डा द्वारा दिया गया ऐसा बयान न केवल पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सिख समुदाय के उन घावों को भी फिर से खोल रहा है, जिन्हें समय के साथ भरने की कोशिश की गई थी।
यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी ने स्वयं श्री सज्जन कुमार से पूरी तरह दूरी बना ली थी। इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों में यह भावना उभर रही है कि अब दोबारा खुले इन घावों पर मरहम लगाने और कांग्रेस पार्टी की नीयत एवं गंभीरता को प्रदर्शित करने के लिए श्री दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से हटा दिया जाना चाहिए।
इस प्रकार की अपरिपक्व और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों ने कांग्रेस पार्टी की स्थिति को कमजोर किया है, विशेषकर उस सिख समुदाय की नजरों में, जिसकी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका है और जहां जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। इसका प्रभाव केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में तथा विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी पड़ सकता है।
सादर,
कुलदीप शर्मा
पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा विधानसभा
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