12/09/25

भक्त सच्चा हो तो विपरित परिस्थितियां भी भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती : श्रीराम मुद्रगल शास्त्री

जे कुमार, अम्बाला 12 सितम्बर - श्री सनातन धर्म सभा (पंजी.) अंबाला छावनी के पितृ उद्धार हेतु संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के चैथे दिन पर अमृतवर्षा करते हुए श्रीराम मुद्रगल शास्त्री प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि यादि भक्त सच्चा हो तो विपरित परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती ।

कथाविस्तार में उन्होने बताया कि भगवत कृपा प्राप्ति के लिए भगवन्नाम एक अमोघ साधन है। पापी दुरात्मा अजामिल ने नारायण नाम के उच्चारण मात्र से भगवतकृपा अनुभव कर कालान्तर में विष्णुलोक प्राप्त किया । श्रीमद्भागवत में भगवान यह बताते है कि मेैं अजन्मा होते हुए भी प्रकट हो जाता हूं। प्रकट होना और अन्तर्धान होना- दोनों ही मेरी अलोैकिक लीलाएं हैं। जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान के अवतार ग्रहण प्रयोजन है-धर्म की स्थापना करने और अधर्म का नाश करना। माता देवकी और वासुदेव के घर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ।

माता देवकी ने कहा-विश्वात्मन शंख,चक्र, गदा और पदम की शोभा से युक्त इसे चार भुजाओं वाले अपने अलौकिक दिव्य रूप को अब छिपा लीजिए। तब भगवान ने माता-पिता के देखते-देखते अपनी माया से तत्काल शिशु का रूप धारण किया। भगवान का वासुदेव द्वारा नन्द बाबा के घर जाना और वहां पर श्रीकृष्ण के जन्म पर सभी का खुश होना। मंगल गीत गाना।

कथा पंडाल महाराज को सभा प्रधान प्रो. तारा चन्द गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर, कोषाध्यक्ष अशोक सिंगला, विन्दलस कैलाश मल्होत्रा, सहायक सचिव संजय गुप्ता, लक्ष्मी नारायण खन्ना, बृज मोहन गोयल, माया राम बंसल, सुशील गोयल, राकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, संजय मल्होत्रा, प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह तथा मन्दिर पुजारियों आदि ने महाराज को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।

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