12/03/26

IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामला: चंडीगढ़ और हरियाणा में ED की बड़ी कार्रवाई

जे कुमार चंडीगढ़, 12 मार्च 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा सरकार के फंड में हुई ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में बुधवार और गुरुवार को चंडीगढ़, गुरुग्राम और मोहाली सहित 19 से 20 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में सरकारी पैसे के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है।

मामले के मुख्य बिंदु : ₹590 करोड़ का गबन: जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार की विभिन्न एजेंसियों (जैसे हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने बैंक में भारी रकम जमा की थी। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर खेल: इन पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के बजाय, बैंक के कुछ पूर्व अधिकारियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी खातों और शेल कंपनियों (Shell Companies) में ट्रांसफर कर दिया।

मनी ट्रेल और निवेश: ED के अनुसार, इस काली कमाई को रियल एस्टेट सेक्टर, सोने की खरीद और चंडीगढ़ के एक होटल व्यवसायी विक्रम वाधवा के प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया है। विक्रम वाधवा फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। डिजिटल सबूतों की तलाश: छापेमारी के दौरान ED की टीमों ने बैंक रिकॉर्ड, कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल दस्तावेज जब्त किए हैं ताकि इस पूरे घोटाले के 'मनी ट्रेल' (पैसे के लेन-देन की कड़ी) का पर्दाफाश किया जा सके।

अब तक की कार्रवाई : गिरफ्तारियां: हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) पहले ही इस मामले में बैंक के पूर्व मैनेजर ऋषभ ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार सहित कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुका है। ED की एंट्री: ACB की जांच के आधार पर अब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर आरोपियों, उनके सहयोगियों और कुछ बिल्डरों के आवासों व दफ्तरों पर दस्तक दी है।

बैंक का पक्ष: IDFC फर्स्ट बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह धोखाधड़ी केवल चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा के कुछ सरकारी खातों तक सीमित थी। बैंक ने हरियाणा सरकार के दावों (मूलधन और ब्याज) का 100% भुगतान पहले ही कर दिया है।

विशेष नोट: यह घोटाला तब उजागर हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर पैसा ट्रांसफर करने को कहा, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और विभाग के स्टेटमेंट में ₹590 करोड़ का भारी अंतर पाया गया।

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