16/09/25

अभियंताओं की टीम भावना से हुए ऐतिहासिक विकास कार्य

एन.एस.बाछल, 16 सितम्बर, जयपुर।

जल संसाधन विभाग की ओर से सोमवार शाम राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में 58वां अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) मनाया गया। भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 164 वीं जयंती पर समारोह में मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अभियंताओं द्वारा टीम भावना से किए कार्यों से ही राजस्थान सिंचाई क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है, विश्वास है कि अभियंताओं के गुणवत्तापूर्वक कार्यों से प्रदेश शीघ्र ही रोल मॉडल बनेगा।

सुरेश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विभाग ‘विरासत के साथ विकास भी‘ की सोच लिए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अभियंताओं से जल संसाधन के ऐतिहासिक विकास कार्यों के दस्तावेजों और पुस्तकों का अध्ययन करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इतिहास का अध्ययन करके ही अभियंता बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने जल संरचनाओं के कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता से समझौता नहीं करने के निर्देश दिए।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि विभागीय विकास कार्यों के लिए सेवानिवृत्त अभियंताओं से बहुमूल्य सुझाव लिए जाएंगे। समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, मुख्य अभियंता व अतिरिक्त सचिव श्री भुवन भास्कर, मुख्य अभियंता श्री रवि सोलंकी, योगेश मित्तल ने संबोधित कर अभियंताओं को बधाइयां दीं। इस अवसर पर विभागीय अभियंताओं को सर विश्वेश्वरैया के आदर्शों को आत्मसात कर “जल है तो कल है” के संकल्प के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त वरिष्ठ अभियन्ताओं (75 वर्ष से ऊपर) का सम्मान किया गया। इनमें भरत कुमार सिंघल, एस.के. गुप्ता, अजीत सिंह, बी.पी. शर्मा, किशोर सिंह, जे.पी. आचार्य, अरुण कुमार गुप्ता को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। इन्होंने प्रदेश के विकास में अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

उल्लेखनीय है कि भारतरत्न सर विश्वेश्वरैया भारतीय अभियंत्रण जगत के महानायक थे। उन्होंने बांध, नहर और जल प्रबंधन की अभिनव योजनाओं से भारत को नई दिशा दी। उनके योगदान को स्मरण करते हुए अभियंता दिवस मनाया जाता है।

राजस्थान में जल संसाधन विभाग के अभियंता राज्य की जीवन रेखा माने जाते हैं। सिंचाई परियोजनाओं, बांधों एवं नहरों का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने, जल संरक्षण ढांचों का विकास तथा जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। कठिन परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विभागीय अभियंता अपने अनुभव, परिश्रम और समर्पण से प्रदेश को जल-समृद्ध बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

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