करनाल बसताड़ा टोल प्लाजा पर हाई-टेक MLFF सिस्टम शुरू: बिना रुके कटेगा टैक्स, देखें इन लोगों की टोल माफी खत्म
करनाल, 23 जून (अन्नू): हरियाणा के करनाल में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और तकनीकी रूप से क्रांतिकारी खबर है। बसताड़ा टोल प्लाजा पर आज से अत्याधुनिक 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' (MLFF) सिस्टम को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। इस नए सिस्टम के शुरू होने के बाद अब वाहनों को टोल टैक्स का भुगतान करने के लिए बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि टोल प्लाजा पर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर्स चलते हुए वाहन से अपने आप टोल राशि काट लेंगे।
इस नए सिस्टम के लागू होने के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल छूट (टोल माफी) के नियमों को लेकर भी भारी सख्ती कर दी है। अब केवल राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के तहत आने वाले चुनिंदा लोगों और आपातकालीन वाहनों को ही छूट दी जाएगी, जबकि कई पुराने दावों और रियायतों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
सशस्त्र बलों के लिए नियम सख्त; रिटायर्ड कर्मियों को देना होगा टोल
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एनएचएआई (NHAI) के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने पूर्व में जारी आदेशों और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर सशस्त्र बलों (Armed Forces) के कर्मियों को मिलने वाली टोल छूट के नियमों को पूरी तरह स्पष्ट और कड़ा कर दिया है:
केवल ऑन-ड्यूटी कर्मियों को छूट: नियमों के मुताबिक, अब केवल वही सैन्य कर्मी टोल छूट के पात्र होंगे जो एक्टिव ड्यूटी पर तैनात होंगे।
रिटायर्ड कर्मियों को राहत नहीं: सेना के रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) अधिकारियों और कर्मचारियों को अब किसी भी प्रकार की टोल छूट नहीं दी जाएगी।
निजी वाहनों पर टैक्स: यदि सेना का कोई अधिकारी अपने निजी (पर्सनल) वाहन में यात्रा कर रहा है और वह वाहन किसी सरकारी कार्य में इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से टोल टैक्स देना होगा।
वैध पास है जरूरी: छूट का दावा करने के लिए संबंधित सैन्य कर्मी को वर्ष 1942 के स्थापित नियमों के तहत जारी किया गया 'वैध आधिकारिक पास' दिखाना अनिवार्य होगा। बिना पास के किसी भी सूरत में गाड़ी आगे नहीं जाने दी जाएगी।
वकीलों के लिए टोल माफी का कोई प्रावधान नहीं
टोल प्रबंधन ने साफ किया है कि पूर्व में एनएचएआई के जनरल मैनेजर (सीओ) द्वारा जारी स्पष्टीकरण के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 (संशोधित 2010 और 2016) का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। इसमें साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि देश में वकीलों (Advocates) को टोल टैक्स में छूट देने का कोई विधिक प्रावधान नहीं है, इसलिए उन्हें भी सामान्य नागरिकों की तरह टोल चुकाना होगा।
केवल इन VIPs Taylor और माननीय लोगों को मिलेगी छूट
संशोधित नियमों के तहत बसताड़ा टोल प्लाजा से गुजरने वाले निम्नलिखित संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और गणमान्य लोगों को ही टोल से मुक्त रखा गया है:
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री।
राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश।
थल सेना, वायु सेना व नौसेना के प्रमुख और उच्च सैन्य अधिकारी।
अपने संबंधित राज्य में वैध पहचान पत्र के साथ सांसद (MP) और विधायक (MLA)।
परमवीर चक्र, अशोक चक्र, वीर चक्र जैसे देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों से सम्मानित विजेता।
सरकारी, आपातकालीन और दिव्यांगों के वाहनों को भी राहत
वीआईपी सूची के अलावा समाज की सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े निम्नलिखित वाहनों को टोल टैक्स से शत-प्रतिशत छूट दी गई है:
ऑन-ड्यूटी सेना, स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के वाहन।
दमकल विभाग (Fire Brigade) की गाड़ियां।
मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस (Ambulance)।
अंतिम संस्कार के लिए जा रहे शव वाहन।
एनएचएआई (NHAI) और केंद्र/राज्य सरकार के निरीक्षण व प्रशासनिक वाहन।
विशेष श्रेणी: ऐसे वाहन जो दिव्यांग (Physical Challenged) व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन या मॉडिफाई किए गए हैं, उन्हें भी टोल शुल्क से पूरी राहत मिलेगी।
कैसे काम करेगा MLFF सिस्टम और क्या है सरकार का उद्देश्य?
बसताड़ा टोल प्लाजा पर स्थापित किया गया एमएलएफएफ (MLFF) सिस्टम हाईवे की पूरी व्यवस्था को बदल देगा। इसके तहत टोल लेन पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं, जो बिना बैरियर के भी वाहन के गुजरते ही उसकी पहचान कर फास्टैग या डिजिटल वॉलेट से पैसे काट लेंगे। इससे हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और ईंधन व समय दोनों की बड़ी बचत होगी।
टोल अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि कोई वाहन चालक बिना पात्रता या फर्जी दस्तावेज दिखाकर छूट लेने की कोशिश करेगा या जानबूझकर टोल चोरी करेगा, तो उसके खिलाफ एनएचएआई नियमों के तहत सख्त कानूनी and दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश की टोल व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, हाई-टेक और तेज बनाना है।
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