हाईकोर्ट का आदेश: नाना-नानी नहीं, पिता ही होगा बच्चे का असली संरक्षक; मामा की याचिका खारिज

चंडीगढ़, 12 अप्रैल (अन्‍नू): पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए सफीदों फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक नाबालिग बच्चे के लिए उसका जैविक  पिता ही सबसे उत्तम गार्जियन हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने बच्चे के मामा द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें बच्चे की कस्टडी नाना-नानी के पास रखने की मांग की गई थी। आमतौर पर कस्टडी के मामलों में मां का पक्ष मजबूत माना जाता है, लेकिन इस विशेष मामले में अदालत ने पिता को ही बच्चे के भविष्य के लिए सही माना।



किडनैपिंग के आरोपों और 'क्रिमिनल' दलील को नकारा

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, महिला ने 2018 में अपने पति के खिलाफ असंध थाने में बच्चा किडनैप करने का मुकदमा दर्ज कराया था। महिला के भाई ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि पिता का आचरण आपराधिक है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि संबंधित मामले में आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं, इसलिए उन्हें 'अपराधी' कहना तर्कसंगत नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मां की अनुपस्थिति में, विशेषकर जब बच्चा लड़का हो, तो पिता की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।



विदेश में रह रही मां और 10 साल का विवाद

अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि बच्चे की मां मई 2024 से कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही है। हालांकि मामा पक्ष का कहना था कि बच्चा अपने नाना-नानी के पास रह रहा है और वही उसकी शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि मां की गैर-मौजूदगी में नाना-नानी या मामा, पिता का स्थान नहीं ले सकते। पति-पत्नी के बीच पिछले 8 वर्षों से विवाद चल रहा है, लेकिन इसका असर बच्चे के प्राकृतिक अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।


अंतरिम कस्टडी और पिता की भूमिका

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी साफ किया कि वर्तमान में ट्रायल कोर्ट ने पिता को बच्चे की 'अंतरिम कस्टडी' दी है। यह फैसला बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। अदालत ने माना कि कानूनी और प्राकृतिक रूप से पिता ही बच्चे का स्वाभाविक संरक्षक है। इस फैसले से उन मामलों में एक नई नजीर पेश हुई है जहाँ मां विदेश में हो या बच्चे से दूर रह रही हो, ऐसी स्थिति में पिता के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है।



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