हरियाणा में एग्रीस्टैक के तहत 1.38 करोड़ किसानों का पंजीकरण होगा; ओटीपी-आधार आधारित पंजीकरण
चंडीगढ़, 16 दिसम्बर (अभी) : हरियाणा सरकार ओटीपी आधारित आधार प्रमाणीकरण प्रक्रिया के माध्यम से किसान रजिस्ट्री (एग्रीस्टैक) के तहत 1.38 करोड़ किसानों का पंजीकरण करने जा रही है। यह जानकारी राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपायुक्तों, जिला राजस्व अधिकारियों और तहसीलदारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसान रजिस्ट्री (एग्रीस्टैक) और डिजिटल फसल सर्वेक्षण (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा करते हुए दी।
समीक्षा के दौरान, डॉ. मिश्रा ने उपायुक्तों को राजस्व और कृषि विभागों के साथ घनिष्ठ समन्वय में ग्राम स्तर पर शिविर आयोजित करके विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया ताकि कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि किसान पंजीकरण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण दोनों को फरवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाए, और इस बात पर जोर दिया कि व्यापक कवरेज के लिए किसानों की अधिकतम भागीदारी और ग्रामीण क्षेत्रों में लक्षित पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस पहल को किसानों के लिए क्रांतिकारी बताते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि आधार ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग करके 1.38 करोड़ कृषि आईडी बनाई जाएंगी, जिससे सटीकता, पारदर्शिता और लक्षित लाभों का वितरण सुनिश्चित होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सटीक और समय पर डेटा संग्रह से डिजिटल भूमि और फसल अभिलेखों को मजबूती मिलेगी, कृषि योजनाओं का बेहतर लक्षित वितरण होगा और कुशल एवं पारदर्शी लाभ वितरण संभव होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक जिले में अतिरिक्त उपायुक्तों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है ताकि जमीनी स्तर पर प्रगति की निगरानी की जा सके और परिचालन संबंधी मुद्दों का समाधान किया जा सके, जबकि उपायुक्त अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा करेंगे।
उन्होंने आगे बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया कल से तीन जिलों - अंबाला, पंचकुला और फरीदाबाद में शुरू होगी। समय पर पूरा करने पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसान रजिस्टर सीधे पीएम-किसान योजना और अन्य लाभार्थी योजनाओं से जुड़ा होगा, इसलिए निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण लक्ष्य को पूरा करना अनिवार्य है।
फाइल प्रोसेसिंग में अनुशासन की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के मामलों को किसी भी परिस्थिति में दो बार से अधिक वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, वापसी की समय सीमा पांच दिन से घटाकर 48 घंटे कर दी गई है। उपायुक्तों और जिला राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अनुमोदनों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और देरी और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एफआईएफओ (फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट) प्रणाली का सख्ती से पालन करें।
भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य ज्ञान अधिकारी और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सलाहकार श्री राजीव चावला ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा में भाग लिया। डॉ. मिश्रा ने कहा कि राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से विशेष पंजीकरण शिविर आयोजित करेंगे ताकि भूमि अभिलेखों को कृषि संबंधी कल्याणकारी योजनाओं से सुचारू रूप से जोड़ा जा सके।
कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए, उपायुक्त, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ जिला अधिकारी अंबाला, पंचकुला और फरीदाबाद में कार्यान्वयन की देखरेख करेंगे। राजस्व और कृषि अधिकारियों की संयुक्त टीमें कल से एग्रीस्टैक पंजीकरण शिविर शुरू करेंगी। डॉ. मिश्रा ने बताया कि लगभग 46,000 पेपरलेस पंजीकरण पहले ही पूरे हो चुके हैं, जो जमीनी स्तर पर निरंतर प्रगति को दर्शाता है, और इस बात पर जोर दिया कि निरंतर निगरानी, स्पष्ट जवाबदेही और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय डिजिटल शासन सुधारों की सफलता की कुंजी हैं।
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