गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस आज, बलिदान और आस्था का प्रतीक
आरएस अनेजा, 30 मई नई दिल्ली
गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस हर साल सिख धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसे आज 30 मई को मनाया जा रहा है। यह दिन सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी की शहादत की याद में मनाया जाता है।
अपना पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित करने वाले, गुरु अर्जुन देव ने वर्ष 1606 में अपनी शहादत से इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय रच दिया था।
गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को ही गुरु अर्जुन देव शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह सिख धर्म के लिए महत्वपूर्ण दिन में से एक है। इस दिन को सिख समुदाय, बलिदान और आस्था का प्रतीक मानते हैं। इसके साथ ही यह दिवस गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, शिक्षाओं और उनके बलिदान को याद करने का अवसर भी प्रदान करता है।
सिखों के पांचवें गुरु और सिख धर्म के पहले शहीद अर्जुन देव या गुरु अर्जुन देव का जन्म 15 अप्रैल, 1563 को गोइंदवाल साहिब, तरनतारन, पंजाब में हुआ था। उनके पिता गुरु रामदास, सिखों के चौथे गुरु थे और उनकी माता बीवी भानी, एक गृहिणी थी। वर्ष 1579 में उनका विवाह माता गंगा जी के साथ होगया। दोनों का एक पुत्र हुआ, जिनका नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठवें गुरु बने। बता दें कि गुरु अर्जुन देव जी ने वर्ष 1604 में अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखी। यह गुरुद्वारा आज स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही इसे सिख धर्मों का सबसे पवित्र स्थल भी माना जाता है।
गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस या ‘शहीदी दिवस’ इस साल आज मनाया जा रहा है। आपको बता दें कि यह हर साल सिख कैलेंडर के तीसरे महीने जेठ के 24वें दिन मनाया जाता है। गुरु अर्जुन देव शहीदी दिवस, दुनिया भर के सिखों समुदाय के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन लोग विभिन्न तरह के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं और “श्री गुरु ग्रंथ साहिब” का पाठ करते हैं। इसके अलावा वे देशभर के कई गुरुद्वारों में लंगर भी वितरित किये जाते हैं।
सिख धर्म के पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी को मुगल सम्राट जहाँगीर के शासनकाल में वर्ष 1606 में मृत्युदंड दिया गया था। बता दें कि वर्ष 1605 में जब मुगल बादशाह अकबर की मृत्यु हुई तो जहांगीर ने राजगद्दी संभाली। उनके साम्राज्य संभालते ही गुरु अर्जुन देव के विरोधी सक्रिय हो गए और वे जहांगीर को उनके खिलाफ भड़काने लगे। इसी दौरान शहजादा खुसरो ने अपने पोता जहांगीर के खिलाफ बगावत कर दी और गुरु जी के पास शरण ले ली। इस बात की जानकारी जब जहांगीर को हुई तो उसने अर्जुन देव को गिरफ्तार कर लिया। जहांगीर ने गुरु जी पर बगावत का आरोप लगाया उन्हें भयानक यातनाएं दी गईं। उन्हें गर्म तवे पर बैठाया गया, उनके ऊपर गर्म रेत और तेल डाला गया। इस तरह उन्हें पांच दिनों तक लगातार यातनाएं दी गईं। इन यातनाओं का उन पर इतना भयानक प्रभाव पड़ा कि वे मूर्छित हो गए। इसके बाद जहांगीर ने क्रूरता की हदें पार करते हुए, गुरु जी के मूर्च्छित शरीर को रावी नदी में बहा देने का आदेश दिया। गुरु अर्जुन देव जी शहीदी दिवस को सिख समुदाय में प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत माना जाता है।
गुरु अर्जुन देव को साहित्य से भी अगाध स्नेह था। ये संस्कृत और स्थानीय भाषाओं के प्रकांड पंडित थे। इन्होंने कई गुरुवाणी की रचनाएं की, जो आदिग्रन्थ में संकलित हैं। इनकी रचनाओं को आज भी लोग गुनगुनाते हैं और गुरुद्वारे में कीर्तन किया जाता है।