अनार, अंजीर व खजूर जैसे फलों से प्रदेश की बन रही नई पहचान-संसदीय कार्य मंत्री,राजस्थान
एन.एस.बाछल, 15 फरवरी, जयपुर।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि पहले प्रदेश सूखाग्रस्त व रेतीले धोरों के रूप में जाना जाता था और अब कृषि वैज्ञानिक व काश्तकारों की लगन और कड़ी मेहनत के चलते अनार, अंजीर व खजूर जैसे फलों की बेहतरीन पैदावार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब गाजर की प्रचुर मात्रा दूसरे शहरों में निर्यात की जा रही है और मूंगफली की भी बेहतरीन पैदावार यहां हो रही है। ऐसे में मंडी स्थापित होने पर किसानों को काफी फायदा होगा। जोगाराम पटेल शनिवार को कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर में नाबार्ड, इफको व आत्मा (कृषि विभाग) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित वृहद कृषि विज्ञान मेले में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से धरती बीमार हो रही है, इस समस्या को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक जैविक उर्वरकों के नए विकल्प दे रहे हैं। विकसित भारत की संकल्पना को साकार करना है तो स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता को प्रमुखता देते हुए किसान जैविक खेती को अपनाएं।
डिग्गी-पौंड की अवधारणा को अपनाएं—
जोगाराम पटेल ने कहा किसान अपने खेतों में डिग्गी—पौंड की अवधारणा को अपनाएं, इससे फसल को दोगुना फायदा होगा। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे खेती में नए अनुप्रयोग व सरकार की लाभकारी योजनाओं का फायदा लेकर कृषि को अपनाएं। किसान की समृद्धि से ही प्रदेश व देश की आर्थिक उन्नति संभव है।
बेरोजगारी दूर करने में कृषि कारगर—
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद किसान आयोग के अध्यक्ष सी आर चौधरी ने कहा उन्नत खेती को अपनाने का संदेश हर गांव—ढाणी में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी को कम करने में सबसे बेहतर उपाय कृषि है। उन्होंने कहा कि किसान फसलों में गुणवत्ता बढ़ाये, अन्यथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद स्वीकार्य नहीं होंगे। जैविक उत्पादों की बाजार में तेजी से मांग है, किसान इस पर कार्य करें।
विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन—
इस दौरान मेले की स्मारिका व विश्वविद्यालय के विभिन्न वैज्ञानिकों की ओर से तैयार प्रकाशनों का विमोचन भी अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ स्टॉल सहित कृषि में नवाचार व उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों का सम्मान भी किया गया।
विभिन्न नव तकनीकियों को दर्शाती 125 से अधिक स्टॉल्स—
मेले की थीम "मरुधरा में विकसित कृषि: आत्म निर्भर भारत" रखी गई। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में स्टार्टअप व उपकरणों का प्रदर्शन करती हुई सरकारी व गैर सरकारी 125 से अधिक स्टॉल्स व प्रदर्शनी लगाई गई।
इसमें कृषि स्टार्टअप, आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रदर्शन, विभिन्न फसलों का मूल्य संवर्धन कर आय वृद्धि करने के लिए तकनीकी जानकारी, बीज, उर्वरक व कीटनाशक उत्पाद प्रदर्शन, आयुर्वेदिक उत्पाद, कृषि मशीनरी सहित कृषि से संबद्ध अन्य सामग्री शामिल रही। इस दौरान विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही कृषि संबंधित जानकारी मेले में आये लोगों को उपलब्ध कराई गई।
वैज्ञानिक शोध क्षेत्रों का किया भ्रमण—
मेले में उपस्थित किसानों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने अनुसंधान क्षेत्र का भ्रमण कराया एवं उन्नत बीजों एवं तकनीकी की जानकारी दी। मेले के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्र भी वैज्ञानिकों की ओर से किसानों के लिए आयोजित किये गए।
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