बैंक धोखाधड़ी मामला: IOB के पूर्व ब्रांच मैनेजर और एक अन्य को 3 साल की कठोर सजा, CBI कोर्ट ने लगाया ₹1.12 करोड़ से अधिक का जुर्माना
नई दिल्ली/अहमदाबाद, 18 जुलाई (अन्नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने गुजरात के हिम्मतनगर में इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) से जुड़े एक बड़े बैंक फ्रॉड मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सीबीआई द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अहमदाबाद स्थित सीबीआई कोर्ट ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर) नीरज कुमार जैन और एक निजी व्यक्ति केतनकुमार मोहनलाल पटेल को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है.
अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल मिलाकर ₹1,12,60,000 (1 करोड़ 12 लाख साठ हजार रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है.
₹2.60 करोड़ के लोन घोटाले में हुए दोषी करार
सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला साल 2012-13 का है. तत्कालीन मैनेजर नीरज कुमार जैन ने अक्टूबर 2012 से सितंबर 2013 के दौरान अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नीलेशकुमार दयाभाई पटेल, केतनकुमार एम पटेल और 13 अन्य कर्जदारों (बॉरोअर्स) के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी.
इन लोगों ने 'ग्रीनहाउस प्रोजेक्ट' लगाने के नाम पर जाली और फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली बताते हुए बैंक को ₹2.60 करोड़ का चूना लगाया. मैनेजर ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर इन फर्जी लोन को मंजूरी दी और राशि जारी की.
रिश्तेदारों के नाम पर लिए थे 14 एग्रीकल्चर लोन
सीबीआई की जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि पूर्व मैनेजर नीरज जैन ने ग्रीनहाउस प्रोजेक्ट लगाने के लिए 14 एग्रीकल्चर टर्म लोन (कृषि सावधि ऋण) मंजूर किए थे. इनमें से नीलेशकुमार दयाभाई पटेल ने दो लोन और केतनकुमार एम पटेल ने बारह लोन अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर आवेदन करके लिए थे. आरोपियों ने प्रत्येक लोन के लिए ₹19 लाख की राशि स्वीकृत कराई, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और खुद को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया.
सीबीआई की चार्जशीट और कोर्ट का फैसला
सीबीआई ने मामले की गहनता से जांच करने के बाद 24 दिसंबर 2014 को पूर्व मैनेजर नीरज कुमार जैन और तीन निजी व्यक्तियों (नीलेश दयाभाई पटेल, केतन कुमार मोहनलाल पटेल और अविनाश यशवंतकुमार पटेल) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.
पूरा ट्रायल चलने के बाद सीबीआई कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के आधार पर पूर्व मैनेजर और केतनकुमार को दोषी पाया. कोर्ट ने पूर्व मैनेजर नीरज कुमार जैन पर ₹2,60,000 और केतनकुमार मोहनलाल पटेल पर ₹1.10 करोड़ का जुर्माना लगाया है.
एक आरोपी बरी, मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार
अदालत ने मामले के एक अन्य आरोपी अविनाश यशवंत कुमार पटेल के खिलाफ आरोप साबित न होने के कारण उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया है. वहीं, इस पूरे घोटाले का एक और मुख्य आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल फिलहाल फरार (Absconding) चल रहा है, जिसके चलते उसके खिलाफ मामले की सुनवाई को अलग कर दिया गया है.
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