सावन का पहला सोमवार, शिव मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब
आरएस अनेजा, 14 जुलाई नई दिल्ली
आज सावन का पहला सोमवार जिसे प्रथम श्रावणी सोमवार भी कहा जाता है, भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। आज इस पावन दिन पर शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
सावन के पहले सोमवार का महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, और इस महीने में पड़ने वाले सोमवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
इस दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाते हैं।
सावन के पहले सोमवार को व्रत रखने का विधान है, और भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं, और शाम को पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।
सावन के पहले सोमवार को शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करना विशेष फलदायी माना जाता है।
सावन सोमवार व्रत की कथा सुनने का भी विधान है।
यह माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सावन सोमवार व्रत रखने से मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है, धार्मिक वेबसाइटों के अनुसार.
सावन सोमवार का व्रत विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है। धार्मिक वेबसाइट के अनुसार
सावन माह:
श्रावण मास:
सावन का महीना, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, भगवान शिव का प्रिय महीना है।
चातुर्मास:
यह महीना चातुर्मास का एक भाग है, जो चार महीनों की अवधि होती है जिसमें भगवान विष्णु शयन करते हैं।
समुद्र मंथन:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था, और भगवान शिव ने विष का पान किया था।
धार्मिक महत्व:
इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल मिलता है।
पर्यावरण:
सावन का महीना प्रकृति के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान बारिश होती है और चारों ओर हरियाली छा जाती है।
सावन का पहला सोमवार भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, और इस दिन शिव भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।