फतेहाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या के प्रयास मामले में दोषी सचिन उर्फ टोनी को 7 साल की बामशक्कत कैद, ₹1.50 लाख जुर्माना

फतेहाबाद, 13 जून (अन्‍नू): फतेहाबाद की एक माननीय अदालत ने करीब 10 साल पुराने हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के एक चर्चित और संगीन मामले में अपना मुख्य फैसला सुनाते हुए मुख्य दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास (कठिन कारावास) की सजा सुनाई है। माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) अमित गर्ग की अदालत ने दोषी पर भारी वित्तीय जुर्माना भी लगाया है, जबकि मामले में नामजद अन्य 5 सह-आरोपियों को भविष्य में सुधरने की अंतिम चेतावनी देते हुए रिहा कर दिया है।

अदालत के इस फैसले के बाद फतेहाबाद की पुलिस अधीक्षक (SP) निकिता खट्टर, IPS ने पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की प्रभावी पैरवी की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा की।

मुख्य दोषी को कैद और जुर्माना; सह-आरोपियों को 'लास्ट वार्निंग'

माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और दलीलों के आधार पर निम्नलिखित फैसला पारित किया:

  • मुख्य दोषी: अदालत ने आरोपी सचिन कुमार उर्फ टोनी को हत्या के प्रयास का मुख्य कसूरवार मानते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर ₹1,50000 (एक लाख पचास हजार रुपये) का नकद जुर्माना भी ठोंका गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

  • सह-आरोपी रिहा: इस मामले में सह-आरोपी के रूप में नामजद विकास, सतीश कुमार उर्फ आशाराम, सुरेन्द्र उर्फ शैलेन्द्र सिंह, सुमित उर्फ दाराराम तथा संजय कुमार को माननीय न्यायालय ने सख्त हिदायत और कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि वे भविष्य में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि से पूरी तरह दूर रहेंगे, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

क्या था मामला: खेत में पाइप लाइन ठीक करते वक्त किया था हमला

इस पुरानी खूनी वारदात की पृष्ठभूमि साझा करते हुए एसपी निकिता खट्टर ने बताया कि मामला थाना भूना क्षेत्र से जुड़ा है।

  • शिकायतकर्ता: गांव खजूरी जाटी निवासी विश्वामित्र (पुत्र राम सिंह बिश्नोई) ने पुलिस को आधिकारिक शिकायत दी थी।

  • वारदात की वजह: 31 मई 2016 को शिकायतकर्ता विश्वामित्र अपने बेटे विनोद उर्फ मनोज, भाई सुभाष और भतीजे सुधीर के साथ मिलकर अपने खेत में कृषि सिंचाई के लिए पाइप लाइन की मरम्मत (रिपेयरिंग) कर रहे थे। उसी समय आरोपी पक्ष के लोग वहां आ धमके और खेत के रास्ते को लेकर पुरानी रंजिश के चलते विवाद करने लगे।

  • लाठी-डंडों से वार और फायरिंग: देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मुख्य आरोपी सचिन उर्फ टोनी और उसके साथियों ने लाठी-डंडों, धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। इस दौरान दहशत फैलाने के इरादे से सीधी फायरिंग (गोलीबारी) भी की गई। इस जानलेवा हमले में विनोद उर्फ मनोज और सुधीर को गोलियां व गंभीर चोटें लगी थीं, जिससे वे लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर गए थे।

तत्कालीन पुलिस टीम ने तैयार की थी मजबूत चार्जशीट; 15 गवाह पेश

घटना की सूचना मिलते ही थाना भूना पुलिस ने 31 मई 2016 को ही आरोपियों के खिलाफ अभियोग संख्या 197, धारा 148, 323, 325, 307 (हत्या का प्रयास), 506 आईपीसी और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

  • सटीक जांच: तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक (ASI) गुलाब के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी आरोपियों को समय रहते गिरफ्तार किया और मौके से हथियार व खाली कारतूस बरामद कर कड़े वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।

  • चालान प्रस्तुति: जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन निरीक्षक विमला देवी द्वारा इस केस की मजबूत चार्जशीट (चालान) तैयार कर 2 अगस्त 2016 को माननीय अदालत में पेश की गई थी।

  • कोर्ट में पैरवी: अदालत के भीतर अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल तथा न्यायवादी नवदीप सिंह बल्हारा ने अत्यंत प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रखा। ट्रायल के दौरान कुल 15 गवाहों की गवाही कोर्ट में दर्ज करवाई गई। मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के दावों और प्रत्यक्षदर्शियों के अटूट बयानों के आगे बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं और कोर्ट ने सचिन उर्फ टोनी को दोषी करार दिया।

अपराधियों को सजा दिलाकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध: एसपी

इस महत्वपूर्ण अदालती फैसले के बाद फतेहाबाद की एसपी श्रीमती निकिता खट्टर ने कहा कि अपराधियों को उनके किए की सजा दिलाना और पीड़ित नागरिकों को हर हाल में न्याय सुनिश्चित करना फतेहाबाद पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कड़क तफ्तीश और कानूनी पैरवी के कारण ही आज इस पुराने मामले में आरोपी को सजा मिल सकी है। उन्होंने समाज को आश्वस्त किया कि महिलाओं, बच्चों और जानलेवा हमलों जैसे संगीन व गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध जिला पुलिस का यह सख्त रुख भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा।

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