गुरुग्राम में 'वजन कम करने' के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 3 युवतियां गिरफ्तार
गुरुग्राम, 28 जून (अन्नू): साइबर सिटी गुरुग्राम की पुलिस ने उद्योग विहार इलाके में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को वजन कम करने (वेट लॉस) का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी कर रहा था। पुलिस ने मौके पर छापेमारी कर तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं, जिनमें 102 मोबाइल फोन, 150 सिम कार्ड और 12 लैपटॉप शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार की गई आरोपियों की पहचान मंदीप (निवासी आया नगर, दिल्ली हाल निवासी चक्करपुर), नेहा (निवासी रंगपुरी, दिल्ली) और वर्षा (निवासी मैनपुरी, उत्तर प्रदेश हाल निवासी सुशांत लोक) के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ साइबर क्राइम वेस्ट थाने में धोखाधड़ी और फर्जी कॉल सेंटर चलाने की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर ऐसे फंसाते थे जाल में
एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था:
फर्जी सोशल मीडिया पेज: आरोपियों ने 'क्योरस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड' (Curest Science & Wellness Pvt Ltd) के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बोगस पेज बना रखे थे।
आकर्षक विज्ञापन: इन पेजों पर वजन कम करने की हर्बल दवाइयां बेचने के लुभावने विज्ञापन चलाए जाते थे।
फर्जी डॉक्टर और डाइटिशियन: जैसे ही कोई पीड़ित इन विज्ञापनों को देखकर पेज पर क्लिक करता, तो कॉल सेंटर से ये युवतियां उनसे संपर्क करती थीं। ये खुद को नामचीन ब्यूटीशियन, डाइटिशियन या डॉक्टर बताकर लोगों को गुमराह करती थीं और दवाइयां बेच देती थीं।
असर नहीं होने पर पैसे वापस करने का झूठा वादा, फिर करते थे ब्लॉक
जांच में सामने आया कि इन तथाकथित हर्बल दवाइयों से वजन रत्ती भर भी कम नहीं होता था। जब पीड़ित ग्राहक शिकायत करते थे, तो आरोपी उन्हें '100% मनी-बैक गारंटी' (रिफंड) का झांसा देकर शांत करा देते थे। हालांकि, बाद में किसी को भी रिफंड नहीं दिया जाता था और पीड़ितों के नंबरों को सीधे ब्लॉक लिस्ट में डाल दिया जाता था।
गुजरात के लोग थे सबसे बड़े टारगेट
पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि इस फर्जी कॉल सेंटर के जरिए सबसे ज्यादा गुजरात के लोगों को निशाना बनाया गया था और उनसे अकेले ही करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी। गुजरात के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह वजन कम करने के नाम पर लाखों-करोड़ों की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।
मैनेजर और डायरेक्टरों के इशारे पर चल रहा था खेल
पुलिस जांच में यह भी साफ हुआ है कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जा रहे सभी मोबाइल नंबर कंपनी के अलग-अलग कर्मचारियों के नाम पर अलॉट थे। इस पूरे फर्जी रैकेट का रिमोट कंट्रोल कंपनी के मैनेजर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO), डायरेक्टर, मालिक और उनके अन्य करीबियों के हाथों में था, जो बैकएंड से पूरा ऑपरेशन संभाल रहे थे। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
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