ED ने ₹1,452 करोड़ की और संपत्ति कुर्क की; कुल कुर्की ₹9,000 करोड़ के करीब पहुँची
पुणे, चेन्नई, मुंबई और भुवनेश्वर में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की जमीन और इमारतें जब्त
नई दिल्ली, 20 नवंबर ।: प्रवर्तन निदेशालय (ED), विशेष कार्य बल, मुख्यालय ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1,452.51 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क (provisionally attached) कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद, इस मामले में कुल कुर्की ₹8,997 करोड़ हो गई है।
कुर्क की गई संपत्ति:
ED ने जो संपत्ति कुर्क की है, उनमें मुख्य रूप से पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर में स्थित जमीन के भूखंड (Plots of Land) और इमारतें (Buildings) शामिल हैं। इसके अलावा, मुंबई के धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC), नवी मुंबई और मिलेनियम बिजनेस पार्क में स्थित कई इमारतें भी कुर्क की गई हैं।
धोखाधड़ी का विवरण:
• यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में चल रही है।
• ED ने सीबीआई द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act), 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी, जिसमें अनिल अंबानी और अन्य आरोपी थे।
• RCOM और इसकी समूह कंपनियों ने 2010-2012 की अवधि से घरेलू और विदेशी कर्जदाताओं से ₹40,185 करोड़ का कुल ऋण लिया था, जो अभी भी बकाया है। 9 बैंकों ने समूह द्वारा लिए गए ऋणों को धोखाधड़ी (Fraud) घोषित किया है।
• ED की जांच में पता चला है कि एक बैंक से लिए गए ऋण का उपयोग अन्य बैंकों से लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान, संबंधित पक्षों को हस्तांतरण और पारस्परिक फंडिंग (Mutual Funding) में निवेश के लिए किया गया था, जो ऋणों के स्वीकृति पत्र (Sanction Letter) की शर्तों के विपरीत था।
ऋण का दुरुपयोग:
• RCOM और इसकी समूह कंपनियों ने ₹13,600 करोड़ से अधिक का ऋण 'एवरग्रीनिंग' (Evergreening) के लिए दिया।
• ₹12,600 करोड़ से अधिक जुड़े हुए पक्षों (Connected Parties) को हस्तांतरित किए गए।
• ₹1,800 करोड़ से अधिक एफडी/एमएफ (FDs/MFs) आदि में निवेश किए गए, जिसे समूह संस्थाओं को पुनर्भुगतान के लिए काफी हद तक समाप्त कर दिया गया था।
• जुड़े हुए पक्षों को फंडिंग करने के उद्देश्य से बिल डिस्काउंटिंग का भारी दुरुपयोग भी ED द्वारा पता चला है।
• कुछ ऋणों को विदेशी प्रेषण (Foreign Outward Remittances) के माध्यम से भारत के बाहर भेज दिया गया था।
ED वित्तीय अपराधों के अपराधियों का सक्रिय रूप से पीछा कर रहा है और अपराध की आय को उनके असली दावेदारों को वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मामले में आगे की जांच जारी है।