विकसित भारत 2047: मजबूत राष्ट्र निर्माण का संकल्प है: प्रोफेसर (डॉ ) राम पाल सैनी
जे कुमार अंबाला कैंट, 1 फरवरी 2026: गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज (जी.एम.एन.), अंबाला कैंट के स्नातकोत्तर एवं शोध विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बहु-विषय संगोष्ठी का आज भव्य समापन हुआ। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय 'विकसित भारत 2047 के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक मार्ग' रहा। इस आयोजन में देशभर के शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने समावेशी और सतत राष्ट्र-निर्माण की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।
समापन दिवस की शुरुआत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने संगोष्ठी के अकादमिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे मंच उच्च शिक्षण संस्थानों को नीति-निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रथम सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. राकेश कुमार ने डिजिटल परिवर्तन और भविष्य के कौशल विकास पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विकसित भारत की यात्रा में तकनीकी नवाचार और शासन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से आईं डॉ. वंदना गर्ग ने अकादमिक शोध को सामाजिक सरोकारों और व्यावहारिक समाधानों से जोड़ने का आह्वान किया।
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में पर्यावरण, सतत विकास और हरित प्रौद्योगिकी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई। डॉ. राजेश कुमार शुक्ला ने कार्बन क्रेडिट तंत्र के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक संतुलन के बीच समन्वय पर विशेष जानकारी दी। अन्य सत्रों में शोधार्थियों ने शिक्षा सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि समावेशी विकास के लिए नीतिगत सुधारों और सामाजिक संरचनाओं के बीच बेहतर तालमेल होना अनिवार्य है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलपति प्रो. रामपाल सैनी रहे। उन्होंने युवा शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शोध का असली मूल्य उसके सामाजिक प्रभाव और नीति-निर्माण में उपयोगिता से तय होता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों को सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन का संयोजन डॉ. चंद्रपाल पूनिया और समन्वय डॉ. नेहा अग्रवाल द्वारा किया गया। अंत में डॉ. के.के. पुनिया ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
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