गांव मोहडा की सरपंच कमलजीत कौर को डीसी अजय सिंह तोमर ने तुरंत प्रभाव से किया निलम्बित
जे कुमार, अम्बाला 20 सितम्बर - डीसी अजय सिंह तोमर ने हरियाणा पंचायती राज हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51 (1)(बी) के तहत खण्ड अम्बाला प्रथम की ग्राम पंचायत मोहडा की सरपंच कमलजीत कौर को जांच से सम्बन्धित रिकार्ड प्रस्तुत ना करने बारे, नाले निर्माण के लिए किसी तकनीकी अधिकारी/कर्मचारी से स्वीकृति ना लेने बारे, बार-बार नाला बनाकर व उखाडक़र सरकारी अनुदान का दुरूपयोग करने बारे व पंचायत के रिकार्ड को खुर्द-बुर्द करने के मामले में तुरन्त प्रभाव से सरपंच पद से निलंिबत करने के आदेश दिए हैं और एक्ट की धारा 51 (2) के तहत ग्राम पंचायत की किसी भी कार्यवाही/बैठक में भाग न लेने बारे आदेश देते हुए ग्राम पंचायत की जो भी चल अचल सम्पत्ति/ राशि रिकार्ड आदि को बहुमत रखने वाले पंच को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
डीसी अजय सिंह तोमर ने बताया कि ग्राम पंचायत मोहड़ा की सरपंच कमलजीत कौर के खिलाफ गांव के ही संदीप कुमार, जसविन्द्र सिंह व अन्य ने लोक सम्पर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में एक शिकायत दी थी जिसकी जांच मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद द्वारा की गई है। जांच करने पर सरपंच के खिलाफ नाले निर्माण के लिए किसी तकनीकी अधिकारी/कर्मचारी से स्वीकृति ने लेने बारे, बार-बार नाला बनाकर व उखाडक़र सरकारी अनुदान का दुरूपयोग करने बारे व सरपंच द्वारा जांच से सम्बन्धित कोई रिकार्ड प्रस्तुत न करने के आरोप लगे हैं।
इसी प्रकार गांव मोहड़ा के ही गुरजिन्द्र सिंह व अन्य ने भी उपमंडल अधिकारी (नागरिक) अम्बाला छावनी को भी गांव मोहडा के सरपंच के खिलाफ शिकायत दी थी जिसमें उन्होंने गांव के सरपंच द्वारा जांच हेतू पंचायत का रिकार्ड जांच अधिकारी को प्रस्तुत न करने बारे, सरपंच द्वारा प्रथम दृष्टि से पंचायत के रिकार्ड को खुर्द-बुर्द करने बारे व उसके खिलाफ पंचायत का रिकार्ड प्रस्तुत न करने पर बारे आरोप लगाए गए हैं। इन दोनों मामलों के तहत जांच उपरांत गांव मोहडा की सरपंच को तुरंत प्रभाव से निलम्बित किया गया है।
बॉक्स: डीसी ने यह भी बताया कि हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51(3) (ई) के तहत नियमित जांच के लिए एसडीएम अंबाला शहर को नियुक्त किया गया है। यदि संरपच कमलजीत कौर इन दोनों मामलों में कुछ कहना एवं अपना पक्ष रखना चाहती है तो वह आदेश मिलने के 10 दिन के भीतर अपना लिखित उतर सीधे जांच अधिकारी को प्रस्तुत कर सकती है अन्यथा जांच अधिकारी एकपक्षीय कार्यवाही करने में सक्षम होगें।