चंडीगढ़ सेवक फार्मेसी फायरिंग मामला: पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, आरोपी राहुल बिष्ट के 'रेव पार्टी' कनेक्शन से हड़कंप
चंडीगढ़, 31 जनवरी(अन्नू) : सेक्टर-32 स्थित सेवक फार्मेसी पर हुई गोलीबारी की जांच अब पुलिस महकमे के भीतर तक पहुंच गई है। जांच के दौरान मुख्य आरोपी राहुल बिष्ट के साथ संदिग्ध संबंध पाए जाने पर पुलिसकर्मी अविनाश को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के घेरे में कई अन्य पुलिसकर्मी भी हैं, हालांकि विभाग ने अभी उनके नामों को गोपनीय रखा है।
हैरान करने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि आरोपी राहुल बिष्ट शहर के कुछ सरकारी डॉक्टरों के लिए रेव पार्टियां आयोजित करता था। चर्चा है कि ये पार्टियां शहर के प्रमुख क्लबों और बाहरी इलाकों में होती थीं। हालांकि, क्राइम ब्रांच ने अभी तक उन डॉक्टरों और क्लबों की पहचान उजागर नहीं की है, जो इन अवैध गतिविधियों का हिस्सा थे। यह मामला पहले थाना-34 में दर्ज था, लेकिन राहुल की गिरफ्तारी के बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली और पूर्व के 'फर्जी मेजर' केस की यादें ताजा कर दी हैं। उस वक्त भी पुलिस अधिकारियों से साठगांठ की बातें उठी थीं, लेकिन चार्जशीट में वे तथ्य गायब मिले। वर्तमान में भी पुलिस की 'वाहवाही' और 'ठोस कार्रवाई' के बीच का अंतर चर्चा का विषय बना हुआ है, विशेषकर तब जब एसपी क्राइम ने शूटरों की गिरफ्तारी की जानकारी तो दी, लेकिन रेव पार्टी सिंडिकेट पर चुप्पी साधे रखी।
वहीं, विभाग के भीतर ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर भी घमासान मचा है। पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए किए गए तबादलों के आदेशों को उनके जाते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। लाइन हाजिर हुआ अविनाश ऑपरेशन सेल में तैनात था, जबकि उसका तबादला काफी समय पहले हो चुका था। आरोप है कि कई थाना प्रभारियों और शाखा प्रमुखों ने अपने चहेते कर्मियों को नियमों को ताक पर रखकर 'डीडीआर' के जरिए वापस बुला लिया है।
पुलिस महकमे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूर्व डीजीपी के सख्त अनुशासन वाले आदेश अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। गौरतलब है कि पूर्व डीजीपी ने डीसीसी में लूट के आरोपियों की मदद करने वाले पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज कर सख्त संदेश दिया था, लेकिन वर्तमान में 'डीडीआर कल्चर' की वापसी से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
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