ट्राइसिटी में घर खरीदना हुआ सपना: हाई कोर्ट ने सरकारी आवास एजेंसियों को लगाई फटकार

चंडीगढ़, 10 मार्च (अन्‍नू): पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली (ट्राइसिटी) में आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी आवास एजेंसियां अब जनकल्याण के अपने प्राथमिक लक्ष्य को भूलकर व्यावसायिक मुनाफाखोरी में जुट गई हैं। इस प्रवृत्ति के कारण मध्यम वर्ग और वेतनभोगी नागरिकों के लिए इन शहरों में अपना घर बनाना लगभग असंभव हो गया है।


जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन को एक ठोस कार्ययोजना पेश करने का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि किफायती आवास योजनाओं के मूल स्वरूप को बहाल करना अनिवार्य है। बेंच ने सुझाव दिया कि सरकारी एजेंसियों को केवल नीलामी पर निर्भर रहने के बजाय लॉटरी प्रणाली जैसे पारंपरिक तरीकों को फिर से अपनाना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिल सके।


सुनवाई के दौरान अदालत ने हुडा (HSVP), गमाडा (GMADA) और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि इन निकायों द्वारा संपत्तियों की नीलामी करोड़ों की शुरुआती कीमतों पर की जा रही है, जो आम पेशेवरों और कम आय वाले लोगों की वित्तीय क्षमता से कोसों दूर है। बेंच ने याद दिलाया कि इन संस्थाओं का निर्माण अधिक से अधिक लोगों को छत मुहैया कराने के लिए किया गया था, न कि सबसे ऊंची बोली लगाने वालों को जमीन बेचने के लिए।


हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, इसके बावजूद वे आम आदमी को राहत देने के बजाय राजस्व बढ़ाने में लगी हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि 'जीवन के अधिकार' में एक सुरक्षित छत और किफायती आवास की सुविधा भी शामिल है। यह राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों के लिए सस्ते घर सुनिश्चित करे।


अदालत ने एक व्यक्ति को केवल एक ही आवंटन देने के पुराने नियम के हटने पर भी चिंता जताई। कोर्ट के संज्ञान में आया है कि प्रतिबंध हटने से अब एक ही प्रभावशाली व्यक्ति नीलामी में कई संपत्तियां हथिया लेता है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद वंचित रह जाते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने एडवोकेट श्रीनाथ ए. खेमका को 'एमिकस क्यूरी' नियुक्त किया है ताकि इस जटिल समस्या का उचित समाधान निकाला जा सके।


#TricityRealEstate #PunjabHaryanaHighCourt #AffordableHousing #ChandigarhNews #MiddleClassHousing #PropertyPrices #JudicialIntervention #DanikKhabar

Previous

अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस: अंबाला उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने अधिकारियों को दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

Next

राजस्थान में भ्रष्ट एवं अनुशासनहीन लोक सेवकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई