मानसून से पहले एक्शन में बराड़ा प्रशासन: एसडीएम सतिंद्र सिवाच ने संवेदनशील गांवों का किया औचक निरीक्षण
बराड़ा/अम्बाला, 24 जून (अन्नू): मानसून के आगमन की आहट को देखते हुए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से तैयारियों में जुट गया है। इसी कड़ी में बराड़ा के उपमंडलाधीश (SDM) सतिंद्र सिवाच ने मंगलवार को क्षेत्र के अत्यधिक संवेदनशील माने जाने वाले गांवों का तूफानी दौरा किया। इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संभावित बाढ़ से सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों और जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था की जमीनी हकीकत को परखना था।
एसडीएम ने इस दौरान तंगेल, गोला गोली, तंदवाल और गोकलगढ़ जैसे गांवों का दौरा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
गोकलगढ़ में निर्माणाधीन बांध का निरीक्षण; गुणवत्ता से समझौता न करने की हिदायत
दौरे के दौरान एसडीएम सतिंद्र सिवाच ने विशेष रूप से गोकलगढ़ गांव में चल रहे सुरक्षा बांध के निर्माण कार्य का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद सिंचाई और संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देश दिए:
समय सीमा में काम पूरा हो: मानसून की भारी बारिश शुरू होने से पहले ही सभी सुरक्षात्मक और तटबंध के कार्य हर हाल में पूरे किए जाएं।
गुणवत्ता सर्वोपरि: निर्माण कार्य की गुणवत्ता (Quality) में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नालों व पुलियों की सफाई: बरसाती नालों, ड्रेन और पुलियों के नीचे जमा सिल्ट (मिट्टी) और मलबे को तुरंत साफ कराया जाए, ताकि बारिश के पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और रिहायशी इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की स्थिति पैदा न हो।
एसडीएम ने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल (Coordination) बेहतर करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अभी से 'अलर्ट मोड' पर रहने के आदेश दिए हैं।
कस्बे के भीतर के हालात पर स्थानीय जनता ने उठाए सवाल
प्रशासनिक अमला भले ही कागजों और फील्ड में खुद को मुस्तैद दिखा रहा है, लेकिन स्थानीय कस्बावासियों में अंदरूनी व्यवस्था को लेकर भारी रोष है। एसडीएम के इस दौरे के बाद स्थानीय लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तीखे सवाल उठाए हैं।
कस्बे के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि एसडीएम साहब ने बाहरी क्षेत्रों और नदी-नालों का दौरा तो बड़ी तत्परता से कर लिया है, लेकिन क्या उन्हें बराड़ा कस्बे के भीतर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था और मुख्य बाजारों के हालातों की कोई भनक है? कस्बे के भीतर नालियां जाम पड़ी हैं और मामूली बारिश में ही पूरा बाजार तालाब में तब्दील हो जाता है। ऐसे में केवल ग्रामीण इलाकों और बांधों के भरोसे कस्बे को डूबने से नहीं बचाया जा सकता। जनता ने मांग की है कि प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी और कस्बा क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था को भी तुरंत दुरुस्त करना चाहिए।
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