12/09/25

आर्य समाज की 150वीं जयंती पर आर्य सांस्कृतिक सम्पदा अम्बाला का हुआ शुभारंभ

जे कुमार, अम्बाला 12 सितम्बर - आर्य कॉलेज, अम्बाला छावनी में आर्य समाज की 150वीं जयंती उत्सव पर आर्य सांस्कृतिक सम्पदा का शुभारंभ करते हुए एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अनुपमा आर्य द्वारा धर्माचार्य मनोज शास्त्री, मुख्य अतिथि डी.पी. असीजा (सेवानिवृत प्राचार्य सोहन लाल डी.ए.वी. कालेज अम्बाला शहर) और विशिष्ट अतिथियों शोभा धवन, डॉ. कामदेव झा, डॉ. आर.के. चौहान को स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अनुपमा आर्य ने अपने सम्बोधन में कहा कि आर्य समाज धर्म, पंथ, मजहब या सम्प्रदाय नहीं है, यह एक वैचारिक क्रांति हैं। ये सार्वभौमिक और सार्वकालिक है। इसके नियम सभी के लिए हैं और आर्य समाज की संस्कृति हमारे लिए धरोहर है और इसमें निहित महर्षि दयानन्द के सत्य, शिक्षा, समानता और समाज सेवा का सिद्धान्त आज भी प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानन्द ने सर्वप्रथम स्वराज्य शब्द का प्रयोग किया और बताया कि स्वामी दयानन्द का विचार है श्रद्धा के आधार पर कुछ भी स्वीकार न करें, तर्कशील के आधार पर निर्णय लें और हम इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं जिस पर सम्पूर्ण मानव जाति का अधिकार है।

आर्य सांस्कृतिक सम्पदा का यह शुभारम्भ महाविद्यालय और समाज के आध्यात्मिक चेतना को जागृत करेगा बल्कि समाज सेवा, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता की दिशा में भी प्रेरक भूमिका निभाएगा। धर्माचार्य मनोज शास्त्री ने इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि आर्य समाज एक विचार का नाम है। कोई धर्म या मत नहीं है और संसार का उपकार करना ही इस समाज का उद्देश्य है। अगर आप अपना पूर्ण विकास करना चाहते हो तो आप सभी को आत्मिक सामाजिक, शारीरिक उन्नति करनी पड़ेगी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. डी.पी. असीजा ने कहा कि आर्य समाज ऐसी विचारधारा है, जो स्वतन्त्र है और तर्क करने के लिए हमेशा तैयार है। डॉ. कामदेव झा ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि हवन से ही हमारा कल्याण संभव है और बताया कि प्रश्नोपनिषद मे प्रतिक्षण सांस लेना और छोड़ना हवन है। इस अवसर पर डॉ. आर.के. चौहान ने अपने विचारों के द्वारा यज्ञ के महत्व को बताया।

इसके पश्चात् कृतज्ञता ज्ञापन सत्र में एलुमनाई सुनीला विग, कमलेश शर्मा, सविता बजाज, और डॉ. राजिन्द्रा मलिक और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं, परिषदों और  सोसायटी से आए हुए गणमान्य अथितियों कृतज्ञता ज्ञापन स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

पुस्तक विमोचन सत्र में शोभा धवन, पैट्रन के करकमलों द्वारा हवन पुस्तिका ‘‘आर्य आलोक’’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पुस्तकालय में स्थापित आर्य सांस्कृतिक सम्पदा का उद्घाटन धर्माचार्य मनोज शास्त्री द्वारा गायत्री मंत्र के साथ दीप प्रज्जवलित कर किया गया जिसमें सभी सम्मिलित हुए। इस धरोहर में आर्य समाज महापुरूषों की दृष्टि में महर्षि दयानंद के विषय में आर्य समाज के नियम, आर्य समाज की मान्यताएं और स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रमुख ग्रन्थों का उल्लेख प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी ऋषि भोज में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अमनीत, डॉ. पंकज, डॉ. प्रिया शर्मा और ममता भटनागर की देखरेख में हुअ। कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य अतिथियों, परिषदों व सोसायटी के सदस्यों और महाविद्यालय के शिक्षक और गैर शिक्षक उपस्थित रहे।

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