18/09/25

संयुक्त कमांडर सम्मेलन 2025 में सशस्त्र बलों ने भविष्य का रोडमैप तैयार किया

आरएस अनेजा, 18 सितम्बर नई दिल्ली - सशस्त्र बलों द्वारा संयुक्त कमांडर सम्मेलन (सीसीसी) कोलकाता में संपन्न हुआ। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च-स्तरीय मंच के रूप में इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च निर्णयकर्ता रणनीतिक एवं वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए साथ आए।

सीसीसी सशस्त्र बलों के भविष्य के रोडमैप को आकार देने, संयुक्तता बढ़ाने, क्षमता विकास का मार्गदर्शन करने और राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के साथ संरेखण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वर्ष की थीम 'सुधारों का वर्ष - भविष्य के लिए परिवर्तन' उभरती चुनौतियों के लिए बलों को तैयार करने के एक केंद्रित एजेंडे को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मेलन में भाग लिया और राष्ट्र की सुरक्षा में सशस्त्र बलों के अनुकरणीय समर्पण की सराहना की। उन्होंने निरंतर सुधारों और तकनीकी आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्‍होंने विशेष रूप से रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में स्वदेशी विकास पर ज़ोर दिया।

सम्मेलन की शुरुआत संयुक्त संचालन कमान केंद्र द्वारा एक उच्च-प्रभावी प्रदर्शन के साथ हुई। इसके बाद वायु रक्षा का एक जीवंत प्रदर्शन हुआ। इसमें हवाई निगरानी, ​​मिसाइल रक्षा और ड्रोन-रोधी अभियानों में अत्याधुनिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद भविष्य के युद्धों के उभरते स्वरूप पर जीवंत चर्चा हुई, जिसमें तेज़ी से विकसित हो रही तकनीकी प्रगति के संदर्भ में बहु-क्षेत्रीय अभियानों के बदलते प्रतिमानों की जांच की गई। रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने पिछले दो वर्षों के प्रमुख सुधारों और परिवर्तनकारी कदमों की व्यापक समीक्षा की, जिससे प्रगति पर स्पष्टता मिली।

प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण पर केंद्रित एक प्रेरक भाषण दिया। उन्होंने सशस्त्र बलों की बेहतर परिचालन तत्परता के लिए संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर ज़ोर दिया।

रक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता की। इसमें वर्तमान सैन्य तैयारी, क्षमता विकास और भविष्य के युद्धों के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की गहन समीक्षा शामिल थी। भारत के सुरक्षा परिवेश पर वर्तमान भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव के प्रभाव पर विशेष ध्यान दिया गया और रक्षा नियोजन में चुस्ती, लचीलापन और दूरदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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