22/01/26

अंबाला: 400 साल पुराने ऐतिहासिक 'रानी का तालाब' का बदलेगा स्वरूप, लगभग 38 लाख से होगा सौंदर्यीकरण

अम्बाला, 22 जनवरी (अन्‍नू ): अंबाला छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) ने क्षेत्र के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक 'रानी का तालाब' को नया रूप देने की कवायद तेज कर दी है। इस धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के दूसरे चरण के लिए बोर्ड द्वारा ई-निविदा (E-Tender) जारी कर दी गई है। छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) राहुल आनंद शर्मा ने जानकारी दी कि इस आगामी परियोजना के अंतर्गत तालाब में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा और पत्थरों की पिचिंग सहित कई अन्य सजावटी कार्य किए जाएंगे। इन विकास कार्यों पर लगभग 37.93 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसके लिए इच्छुक पक्ष 4 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


लगभग चार शताब्दियों पुराना यह तालाब अपने आप में बेहद समृद्ध इतिहास समेटे हुए है। माना जाता है कि छछरौली रियासत के राजा रणजीत सिंह की रानी यहाँ प्रतिदिन शाही स्नान के लिए आती थीं और समीप बने शिव मंदिर व ज्ञासी माता मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करती थीं। आज भी यह स्थान न केवल अंबाला बल्कि पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। महाशिवरात्रि सहित अन्य विशेष अवसरों पर यहाँ भक्तों का भारी जमावड़ा रहता है, जो अपनी मनोकामनाएं लेकर यहाँ मत्था टेकने पहुँचते हैं।


प्रशासन की योजना इस स्थल को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की है। इसके तहत यहाँ न केवल मूलभूत नागरिक सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी, बल्कि तालाब को एक झील का स्वरूप देकर भविष्य में नौकायान (Boating) की सुविधा भी शुरू करने की योजना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना है। परियोजना की विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर भी साझा की गई है।


"रानी का तालाब मंदिर विशेष आस्था का केंद्र है जोकि पर्यावरण संरक्षित है, इसलिए इस जगह के सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्य की योजना तैयार की गई थी। इस पर लगभग 38 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।" — राहुल आनंद शर्मा, सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।



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