22/02/25

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय समिति गठित की जाएगी - केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

चंडीगढ़, 22 फरवरी (अभी) - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही एक राष्ट्रीय स्तर की समिति गठित की जाएगी। इस समिति के माध्यम से देश के किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसान सही तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाएंगे तो इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी। साथ ही, नागरिकों को रसायन और कीटनाशकों से मुक्त सब्जियां, अनाज और फल मिलने का लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह टिप्पणी गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का अवलोकन करने के बाद की।  कुरुक्षेत्र जिले के कैंथला गांव में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने देशी गायों के लिए गौशाला, गोबर गैस प्लांट, गुरुकुल के छात्रावास और अन्य सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल की प्रगति और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री, गुजरात के राज्यपाल और हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने गांव कैंथला में चल रहे प्राकृतिक खेती के प्रयासों का अवलोकन किया।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कंथला प्राकृतिक खेती फार्म हाउस में गेहूं, गन्ने की फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलों के पौधों को देखकर बहुत प्रभावित हुए। केंद्रीय मंत्री ने गुड़ बनाने की प्रक्रिया का अवलोकन किया और ताजे गुड़ का स्वाद चखने का अवसर प्राप्त किया। इन महत्वपूर्ण प्रथाओं को देखने के बाद, केंद्रीय मंत्री ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुल के खेतों में प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक अनुप्रयोग को देखना वास्तव में सुखद अनुभव है। केंद्रीय मंत्री ने रसायनों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला और कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता में काफी कमी आई है और लाभकारी कीटों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने इन हानिकारक प्रथाओं से उगाए गए उत्पादों से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के बढ़ने की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नहीं बदली तो देश की आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण को होने वाले नुकसान को माफ नहीं करेंगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए यह सही समय है। धीरे-धीरे इस पद्धति को अपनाकर किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम होता है। सही तरीके से की गई प्राकृतिक खेती से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि खाद्यान्न और फसलों की गुणवत्ता भी बढ़ती है। इसके अलावा, इस पद्धति से एक साथ कई फसलें उगाई जा सकती हैं, जिसका एक प्रभावशाली उदाहरण कैंथला गांव के खेत में देखा जा सकता है। वहां की लहलहाती फसलें पुराने समय की खेती की याद दिलाती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने देशभर के किसानों को प्रेरणा के स्रोत के रूप में कैंथला प्राकृतिक खेती मॉडल देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने में असाधारण काम करने के लिए गुजरात के राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत की सराहना की।

मंत्री ने सलाह दी कि किसानों को एक या दो एकड़ जैसे छोटे पैमाने पर प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि उचित प्रशिक्षण आवश्यक है। प्राकृतिक खेती को सही ज्ञान और तकनीक के साथ ही प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हज़ारों लोग इस खेत को देखने आते हैं, जिसे सफल प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में देशभर में पहचाना जाता है।

Previous

जटूसाना-गुरावाड़ा क्षेत्र में औद्योगिक टाउनशिप स्थापित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे-राव नरबीर सिंह

Next

एफ2डीएफ मॉडल से राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी