राष्ट्रीय स्तर पर चमका अम्बाला: कृषि विभाग को मिला प्रतिष्ठित 'स्कॉच अवॉर्ड-2025'
जे कुमार अम्बाला, 12 जनवरी 2026: फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) के क्षेत्र में उत्कृष्ट, नवाचारपूर्ण और परिणामोन्मुख कार्य करने के लिए अम्बाला कृषि विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड-2025 से सम्मानित किया गया है। यह गौरवशाली सम्मान जिले में खेतों में आग लगने की घटनाओं में लाई गई अभूतपूर्व कमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनाई गई प्रभावी रणनीति के लिए प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार प्रक्रिया अत्यंत कठोर और पारदर्शी रही, जिसमें विभाग को तीन चरणों के गहन मूल्यांकन और विशेषज्ञों के मतदान से गुजरना पड़ा। तीनों चरणों में विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई कार्यप्रणाली और रणनीतियों ने देशभर के विशेषज्ञों को प्रभावित किया।
अम्बाला जिले ने फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत योजनाबद्ध और डेटा आधारित कार्यप्रणाली को जमीनी स्तर पर लागू किया, जिसकी वजह से खेतों में आग की घटनाओं में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में जहाँ जिले में 195 फायर घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 99 रह गई। उल्लेखनीय रूप से, वर्ष 2025 में पूरे अम्बाला जिले में केवल 8 फायर घटनाएं ही दर्ज की गईं, जो प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का एक राष्ट्रीय उदाहरण बन गया है।
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान प्रदान किया गया, जिसे अम्बाला कृषि विभाग की टीम के सदस्य डॉ. जसविंदर सिंह, डॉ. राजेश अग्रवाल, करण सिंह, परवीन जूड, दीनदयाल शर्मा और मंदीप सिंह ने प्राप्त किया। इस उपलब्धि के पीछे कृषि विभाग की समर्पित टीम, फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों और विभिन्न प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समय-समय पर की गई समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग ने इस मॉडल को सफल बनाने में मदद की।
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद डॉ. जसविंदर सिंह ने इस सम्मान को अम्बाला जिले के समस्त किसानों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन जागरूक किसानों की जीत है जिन्होंने जिम्मेदारी समझते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों का खेतों में आग न लगाने का संकल्प ही इस सफलता की सबसे मजबूत नींव है। यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि जब प्रशासन और किसान मिलकर कार्य करते हैं, तो स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से संभव होता है।
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