अम्बाला: रामनवमी पर 'राष्ट्रभाषा विचार मंच' की ऑनलाइन संगोष्ठी; साहित्यकारों ने श्रीराम को बताया राष्ट्र का आधार
जे कुमार अम्बाला छावनी, 30 मार्च 2026: अखिल भारतीय साहित्य परिषद से सम्बद्ध राष्ट्रभाषा विचार मंच द्वारा रामनवमी के पावन उपलक्ष्य में एक भव्य ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों ने शिरकत की और श्रीराम के आदर्शों व उनकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर गहन मंथन किया।
रामकथा ग्रंथों में वर्णित ऐतिहासिकता पर चर्चा: कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके बाद मंच के प्रधान डॉ. शशि धमीजा व महामंत्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण और श्रीरामचरितमानस का हवाला देते हुए श्रीराम की ऐतिहासिक प्रामाणिकता को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता, डीएवी कॉलेज पेहवा के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. कामदेव झा ने राम को राष्ट्र का आधार सिद्ध करते हुए उनके आदर्शों के समुच्चय पर प्रकाश डाला।
देश-विदेश से गूंजी काव्य धारा: संगोष्ठी में काव्य पाठ का सिलसिला बेहद प्रभावशाली रहा:
स्पेन से जुड़ीं प्रियंका पाहुजा ने बताया कि रामचरितमानस उनके जीवन का आदर्श है।
छत्तीसगढ़ से रंजना प्रकाश ने अपनी कविता "हे राम सुनो तुम आ जाओ" के माध्यम से भावांजलि अर्पित की।
उत्तर प्रदेश से पवन जैन ने 'अयोध्या से गोधरा' और जल संरक्षण पर आधारित मार्मिक हाइकू प्रस्तुत किए।
अम्बाला छावनी से सेवानिवृत्त शिक्षिका क्षमा लांबा ने श्रीराम की विभूति का गुणगान किया, वहीं गुरुग्राम से सुशीला जी और अम्बाला शहर से गौरी वंदना ने भी काव्यमयी प्रस्तुतियां दीं।
समन्वय के प्रतीक हैं राम: मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने राधेश्याम रामायण और मानस के सौंदर्य बोध को व्यक्त करते हुए कहा, "समन्वय का प्रतीक हैं राम, इंद्रियों की जीत हैं राम।" कार्यक्रम का कुशल संचालन कर रहे डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने अपनी पंक्तियों "राम तुम्हारा नाम स्वयं इक राष्ट्र रूप है" से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में, देवकी गुप्ता और दीपक गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में वंदेमातरम गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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