13/06/26

अम्बाला पुलिस का कानपुर में बड़ा एक्शन: बुजुर्गों और पूर्व सैनिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, संचालक और मैनेजर गिरफ्तार

अम्बाला, 13 जून (अन्‍नू): सोशल मीडिया के जरिए मासूम लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और देश की सेवा कर चुके पूर्व सैनिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का अम्बाला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अम्बाला पुलिस की स्पेशल साइबर टीम ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर के मुख्य संचालक (मास्टरमाइंड) और उसके मैनेजर को दबोचने में सफलता हासिल की है।

चला रहे थे 'इमोशनल ब्लैकमेलिंग' का गंदा खेल: एंकर स्क्रिप्ट

टीवी/डिजिटल एंकर के लिए मुख्य इनपुट: सोशल मीडिया पर दोस्ती का झांसा देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने में अम्बाला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कानपुर में छापेमारी कर फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में कॉल सेंटर के संचालक और मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 19 कीपैड फोन, 10 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और एक टैब भी बरामद किया है।

बताया जा रहा है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए खास तौर पर बुजुर्ग पेंशनभोगियों और पूर्व सैनिकों को निशाना बनाता था। पहले दोस्ती कर भरोसा जीतते थे और फिर इमोशनल ब्लैकमेल कर उनसे पैसे ऐंठते थे। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को सात दिन के रिमांड पर लिया है और उनसे पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

बुजुर्ग पेंशनभोगियों और रिटायर्ड फौजियों को बनाते थे सॉफ्ट टारगेट: वॉयस ओवर (VO)

अम्बाला पुलिस की साइबर टीम को पिछले कुछ समय से डिजिटल ठगी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद तकनीकी सर्विलांस और साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से इस गिरोह का सुराग कानपुर (यूपी) में मिला।

  • ऐसे फंसाते थे जाल में: प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर सक्रिय रहते थे। इनका मुख्य टारगेट समाज के बुजुर्ग पेंशनभोगी और पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) होते थे।

  • भरोसा जीतकर मांगते थे पैसे: आरोपी पहले इन बुजुर्गों से मीठी-मीठी बातें कर दोस्ती का ढोंग रचते थे। जब पीड़ित उन पर पूरी तरह भरोसा करने लगते थे, तो आरोपी खुद को किसी बड़ी मुसीबत या गंभीर बीमारी में फंसा बताकर 'इमोशनल ब्लैकमेलिंग' शुरू कर देते थे। इलाज या मदद के नाम पर पीड़ित बुजुर्गों से अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए जाते थे।

मौके से 29 फोन और टैब जब्त, 7 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर

कानपुर में हुई इस छापेमारी के दौरान अम्बाला पुलिस की टीम ने फर्जी कॉल सेंटर से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था:

  1. 19 कीपैड मोबाइल फोन (फर्जी सिम कार्ड के साथ)।

  2. 10 आधुनिक एंड्रॉयड स्मार्टफोन

  3. 1 इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट (Tab)

पकड़े गए दोनों मुख्य आरोपियों को अम्बाला लाकर स्थानीय माननीय अदालत के समक्ष पेश किया गया। साइबर पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय ठगी के पूरे नेक्सस, बैंक खातों के विवरण और मुख्य सप्लायरों का पता लगाने के लिए अदालत से सात दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है।

अम्बाला पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से बेहद गहनता से पूछताछ की जाएगी। इस फर्जी कॉल सेंटर के तार देश के किन-किन राज्यों से जुड़े हैं और अब तक इन्होंने कुल कितने लाख या करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है, इसका खुलासा होना अभी बाकी है। पुलिस का दावा है कि इस रिमांड के दौरान गिरोह से जुड़े कई अन्य स्थानीय और बाहरी मददगारों की गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

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