अंबाला: 'नंद के आनंद भयो' के जयकारों से गूंजा दयालबाग, धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
अंबाला, 9 अप्रैल (अन्नू): अंबाला छावनी के दयालबाग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भागवताचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य और जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया, पूरा पंडाल "जय कन्हैया लाल की" के उद्घोष से गूंज उठा। कान्हा के जन्म की खुशी में नंदोत्सव मनाया गया, जिसमें श्रद्धालु भजनों की धुन पर जमकर झूमे। इस दौरान भगवान को झूला झुलाया गया और भक्तों के बीच धूमधाम से प्रसाद बांटा गया।
अहंकार त्यागने का दिया संदेश
कथाव्यास वीरेंद्र शास्त्री ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए भक्तों को जीवन का सार समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से अहंकार का त्याग कर सदैव ईश्वर की शरण में रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब भी पृथ्वी पर पाप और अधर्म की सीमा बढ़ती है, तब भगवान धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। कथा के दौरान मथुरा की जेल में कान्हा के जन्म और वासुदेव द्वारा उन्हें यमुना पार कर गोकुल पहुँचाने के दृश्यों का सजीव वर्णन किया गया, जिसे सुनकर भक्त भावविभोर हो गए।
कान्हा के बाल चरित्र की महिमा
श्रीमद्भागवत के माध्यम से शास्त्री जी ने पूतना वध और श्रीकृष्ण के बाल चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण का अवतार केवल असुरों के संहार के लिए नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा और अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देने के लिए हुआ था। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे भगवान के दिखाए मार्ग पर चलें और अपने कर्मों को सेवा भाव से जोड़ें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्ति रस का आनंद लिया।
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