ED ने फर्जी लेटर और लैंड यूज (CLU) घोटाले में आरोपी अजय सहगल पर दर्ज की चार्जशीट; 348 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
जालंधर/मोहाली, 23 जुलाई (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आधिकारिक बयान और जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने फर्जी सहमति पत्रों (Fake Consent Letters) के आधार पर लैंड यूज चेंज (CLU) करवाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत मोहाली स्थित विशेष अदालत (PMLA) में मुख्य आरोपी अजय सहगल के खिलाफ चालान (Prosecution Complaint) दाखिल कर दिया है।
पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की गई इस जांच में ईडी ने कुल 348 करोड़ रुपये के "प्रोसीड्स ऑफ क्राइम" (नशे/अपराध की काली कमाई/अवैध संपत्ति) का खुलासा किया है।
फर्जी दस्तावेजों से 'सनटेक सिटी' प्रोजेक्ट और RERA रजिस्ट्रेशन
ईडी की जांच में सामने आया कि 'इंडीयन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड' के सचिव अजय सहगल ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में फर्जी लेटर जमा करवाकर 108.58 एकड़ कृषि भूमि को रिहाइशी व व्यावसायिक प्लॉट्स ('SUNTEC CITY' प्रोजेक्ट) में बदलने के लिए अवैध रूप से CLU हासिल किया।
GMADA और RERA को धोखा: फर्जी CLU के आधार पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से लाइसेंस और RERA रजिस्ट्रेशन हासिल किया गया।
नियमों की सरेआम धज्जियां: आरोपी ने ईडब्ल्यूएस (EWS) कोटे की जमीन ट्रांसफर नहीं की, बिना रेरा अप्रूवल के यूनिट बेचना शुरू कर दिया और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एरिया के बिना ही अवैध बिल्डिंग प्लान अप्रूव करवाया।
भाइयों की कंपनी को बेचे राइट्स, ला कानेला प्रोजेक्ट्स में फर्जीवाड़ा
जांच में खुलासा हुआ कि सोसाइटी और ABS Townships Pvt. Ltd. (पूर्व में VRS Township) के बीच समझौता किया गया, जिसमें सभी डेवलपमेंट व सेल राइट्स अजय सहगल के भाइयों—संजय सहगल और अनिल सहगल की कंपनी को दे दिए गए।
इसके बाद 'La Canela Phase 1' और 'District 7' प्रोजेक्ट्स के नाम पर रेरा रजिस्ट्रेशन कराकर अवैध कमाई की गई।
'La Canela Phase 2' में बिना किसी रेरा अप्रूवल के ही आवासीय प्लॉट बेच डाले गए।
348 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग: 30.98 लाख कैश जब्त और गिरफ्तारी
ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक:
छापेमारी और कैश जब्ती: मई और जून 2026 में आरोपी के विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और ₹30.98 लाख का अघोषित कैश जब्त किया गया था।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी: अजय सहगल को पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड पाए जाने पर 22 मई 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
कुल संपत्ति का आकलन: ईडी ने पाया कि 348 करोड़ रुपये के कुल घोटाले में 212.58 करोड़ रुपये की बिक्री हो चुकी है, जबकि 135.41 करोड़ रुपये की संपत्ति/प्रॉपर्टी अनसोल्ड (अनबिकी) पड़ी है।
मामले में ईडी की ओर से आगे की कानूनी जांच व कार्रवाई जारी है।
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