अंबाला सिटी: श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा; 'अहंकार मुक्त हृदय पर ही होती है प्रभु की विशेष कृपा'
अंबाला सिटी, 7 सितंबर (अन्नू): अंबाला सिटी स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास गोविंद मुदगिल शास्त्री ने कथा के दौरान रासलीला के गूढ़ अर्थ और भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय बांसुरी के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज और उनके उत्तराधिकारी रविंद्रानंद महाराज ने भी शिरकत कर कथा की महिमा बताई।
बांसुरी के तीन गुणों से जीवन सुधारने का संदेश; भागवत महापुराण का हुआ पूजन:
बांसुरी के तीन गुण: गोविंद मुदगिल शास्त्री ने बताया कि बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है क्योंकि इसमें तीन प्रमुख गुण हैं—यह सुरीली है, सीधी है और भीतर से पूरी तरह खाली होती है। ठीक इसी प्रकार सरल व्यवहार, मधुर वाणी और अहंकार मुक्त हृदय वाले मनुष्य पर ईश्वर की सदैव कृपा बरसती है।
जीव और परमात्मा का मिलन है महारास: कथा व्यास ने महारास को जीव और ब्रह्म के पवित्र मिलन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मन का भाव बदलते ही व्यक्ति का संसार बदल जाता है और सकारात्मक विचार जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।
वृंदावन के 5 प्रमुख स्वरूपों का उल्लेख: कथा के दौरान वृंदावन के पांच प्रमुख स्वरूपों—श्री बांके बिहारी, राधा वल्लभ, राधा रमण, गोविंद देव और श्रीनाथ जी का विशेष उल्लेख किया गया।
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संगम: महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज के उत्तराधिकारी रविंद्रानंद ने कहा कि भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम है, जिसके केवल श्रवण मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
समिति पदाधिकारियों ने किया पूजन: कथा के अंत में श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान विनोद बंसल और प्रेम सागर ने सपरिवार भागवत महापुराण की आरती उतारकर विधिवत पूजन किया।
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