पराली प्रबंधन के तहत उपायुक्त एवं सम्बन्धित अधिकारियों से हुई समीक्षा बेठक
जे कुमार, अम्बाला, 30 सितम्बर - उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने आज अपने कार्यालय के सभागार में सम्बन्धित अधिकारियों की एक बैठक लेते हुए पराली प्रबंधन के तहत किए जा रहे कार्यों बारे विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा चण्डीगढ़ से वीसी के माध्यम से पराली प्रबंधन के तहत उपायुक्तों एवं सम्बन्धित अधिकारियों से जिलों में किए जा रहे कार्यों बारे विस्तार से समीक्षा की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने वीसी के दौरान मुख्य सचिव को अवगत करवाते हुए बताया कि जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला स्तर, उपमंडल स्तर व ग्रामीण स्तर पर कमेटियां गठित की हुई है। इसके साथ-साथ पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जागरूक भी किया जा रहा है और उन्हें सरकार द्वारा पराली प्रबंधन करने बारे कृषि यंत्रों की जानकारी के साथ-साथ पराली प्रबंधन के तहत पराली का खेतों में सही निस्तारण हो, इसके लिए प्रति एकड़ 1200 रूपए की राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाने वाली जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 639 ग्राम स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जिनमें कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य सम्बन्धित विभागों के कर्मचारियों की डयूटी लगाकर पूरी गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग अम्बाला शहर में स्थापित कमरा नम्बर 17 को कन्ट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका दूरभाष नम्बर 0171-2530517 हैं व नोडल अधिकारी का मोबाईल नम्बर 9416673733 है। इस नम्बर पर कोई भी व्यक्ति फोन करके पराली प्रबंधन हेतू कृषि यंत्रों की जानकारी ले सकता है।
उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने वीसी के उपरांत सम्बन्धित अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्हें निर्देश दिए कि वीसी में जो दिशा-निर्देश मिले है उसकी अनुपालना के तहत सभी कार्य होने सुनिश्चित होने चाहिए। सम्बन्धित जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है वे फिल्ड में सतर्क रहकर हर गतिविधि पर नजर रखते हुए कार्य करें। उन्होंने बैठक के क्रम में यह भी बताया कि पराली न जले इसको लेकर भारतीय सुरक्षा संहिता की धारा के तहत आदेश भी जारी किए गए हैं। यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर के साथ-साथ जुर्माने का भी प्रावधान हैं। इतना ही नहीं यदि कोई पंजीकृत किसान है और वह इस मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसका पंजीकरण निरस्त करते हुए आगामी दो वर्षो तक मंडियों मे उसकी फसल की सरकारी खरीदी नहीं की जाएगी।
इसके साथ-साथ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जो योजनाएं क्रियान्व्ति है उससे भी वह वंचित रहेगा। उन्होनें यह भी बताया कि किसान कै डिट कार्ड को भी निरस्त करने के लिए भी लिखा जाएगा। इसके साथ-साथ ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पर जिस पंजीकृत किसान का मुआवजा है तो वह भी निरस्त कर दिया जाएगा।
उपायुक्त ने सभी किसानों से आग्रह किया है कि वह कृषि यंत्रों के माध्यम से ही पराली का प्रबधंन करें। विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में कृषि यंत्र उपलब्ध है। उन्होनें यह भी कहा कि जिला प्रशासन यह नहीं चाहता कि कोई भी पंजीकृत किसान सरकारी योजनाओं से वंचित रहें। उन्होनें यह भी बताया कि पराली जलने से जहां वातावरण प्रदूषित होता है वहीं मानव जीवन पर भी इसका दूष्प्रभाव पड़ता हैं। खेतों में फसलों के अवशेष जलने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है तथा जो मित्र कीट होते है वह भी नष्ट हो जाते हैं।
बॉक्स:- उपायुक्त ने सम्बन्धित चारों एसडीएम को निर्देश दिए कि वे भी पराली प्रबंधन को लेकर उपमंडल स्तर पर सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें इस बारे अवगत करवाएं। उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी को बेहतर समन्वय बनाते हुए कार्य करना है ताकि जिले में पराली जलाने की घटनाएं न हों।
इस मौके पर एसीयूटी राहुल कनवरिया, एसडीएम दर्शन कुमार, एसडीएम सतिन्द्र सिवाच, एसडीएम शिवजीत भारती, एसडीएम विनेश कुमार, उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ जसविन्द्र सैनी, डीडीपीओ दिनेश शर्मा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से क्षेत्रीय प्रबधंक अजय सिंह के साथ-साथ सम्बध्ंिात अधिकारीगण मौजूद रहें।
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