आपातकाल के 50 वर्ष : संस्कृति मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने लोकतंत्र में देश की निष्ठा प्रदर्शित करने के लिए ‘संविधान हत्या दिवस’मनाया
आरएस अनेजा, 27 जून नई दिल्ली
देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक आपातकाल के लागू होने की 50वीं वर्षगांठ पर संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम का आयोजन किया। यह अवसर संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा करने और लोकतंत्र के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के महत्व की याद दिलाता है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
आपातकाल के काले दिनों की याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमित शाह ने आपातकाल के काले दिनों को न केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में, बल्कि लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के लिए एक स्थायी सबक के रूप में याद करने के महत्व पर बात की।
"बुरी घटनाओं को आमतौर पर भुला दिया जाता है। लेकिन जब ऐसी घटनाएं सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़ी होती हैं, तो उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए। यह इसलिए ज़रूरी है ताकि देश के युवाओं में सही मूल्यों का संचार हो, वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए तैयार रहें और यह सुनिश्चित करें कि ऐसी काली घटनाएं कभी न दोहराई जाएं।"
शाह ने कहा कि इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है, जिसे गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से औपचारिक रूप दिया है। यह दिन युवा पीढ़ी को अधिनायकवाद के खतरों और संविधान की भावना को बनाए रखने की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करने का काम करता है।
"इस दिन को याद रखना बहुत ज़रूरी है ताकि भविष्य में कोई भी इस देश में निरंकुशता न थोप सके। आपातकाल के दौरान एक ख़तरनाक विचारधारा ने जड़ें जमा लीं - कि पार्टी देश से बड़ी है, परिवार पार्टी से बड़ा है, व्यक्ति परिवार से बड़ा है और सत्ता राष्ट्रीय हित से ऊपर है।"
उन्होंने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय भावना प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘राष्ट्र प्रथम’ के विचार को प्रतिबिंबित करती है:
"प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्र प्रथम' का विचार अब लोगों के दिलों में गूंज रहा है। यह बदलाव लोकतंत्र के उन हजारों योद्धाओं के संघर्ष के कारण संभव हुआ है, जिन्होंने 19 महीने जेल में बिताए। आज, श्री मोदी के नेतृत्व में, 140 करोड़ भारतीय 2047 तक देश को हर क्षेत्र में पूरी दुनिया में नंबर एक बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं - और उस लक्ष्य की ओर संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।"