धरती की बुझी पियास से दक्षिण पन्ना की ज़िरियों में फिर लौटी जैव-विविधता : मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 29 मई, भोपाल।
जल गंगा संरक्षण मिशन के अंतर्गत, दक्षिणा पन्ना वन के रापुरा रेंज के भरतला क्षेत्र में स्थित रामडोल की ज़ीरिया और दाना बाबा की ज़ीरिया में प्राकृतिक जलमार्गों की सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया। इसके परिणामस्वरूप, ये जलस्रोत पुनर्जीवित हो गए हैं और भीषण गर्मी में भी इनमें पानी का प्रवाह जारी है। इससे बोरवेल के आसपास के वन क्षेत्रों में जंगली पक्षियों की वापसी हुई है और क्षेत्र की जैव विविधता पुनर्जीवित हुई है।
प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खी के छत्ते शहद से भरे हुए दिखाई देते हैं। पक्षियों के घोंसलों में पक्षियों की संख्या फिर से बढ़ गई है और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। दुधराज (एशियाई पैराडाइज फ्लाईकैचर) , ब्लैक-नैप्ड मोनार्क , किंगफिशर , बाज , उल्लू , मोर , हरिएल और जंगली मुर्गा जैसी कई पक्षी प्रजातियां वन क्षेत्र अब वन्यजीवों , स्थानिक और प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक पर्यावास बन गया है ।
स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान प्राकृतिक जलप्रपात सूख जाते थे। जल गंगा संरक्षण मिशन के तहत वन विभाग ने इन नालों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत की। वन विभाग के प्रयासों के फलस्वरूप इस वर्ष इन धाराओं में लगातार जल प्रवाह हो रहा है। वन्यजीवों और पक्षियों को जल स्रोतों से आश्रय मिल रहा है। साथ ही, यह वन क्षेत्र मधुमक्खियों , तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय स्थल बन गया है ।
जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण के इस समन्वित प्रयास ने दक्षिणा पन्ना वन में प्रकृति संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।
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