गुणवत्ता निगरानी के लिए मानक मापदंड निर्धारित किए जाने चाहिए: राज्यपाल मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 25 जून, भोपाल।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं के उद्देश्य और कार्यान्वयन की व्यवहार्यता में संवेदनशीलता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः एक तकनीकी विषय है, इसलिए इसे लाभार्थियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए। निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड निर्धारित किए जाने चाहिए। अधिकारियों द्वारा इन मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता जांच की जानी चाहिए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल लोक भवन में आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में राज्यपाल को प्रधानमंत्री जनमान योजना के तहत 11 बुनियादी ढांचागत और 7 लाभार्थी आधारित योजनाओं तथा धरती आबा आदिवासी ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 17 खंडों में चल रही 25 योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमान योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की पहल हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करने की प्रथा उचित नहीं है। रणनीति यह होनी चाहिए कि कार्य समय सीमा से पहले पूरा किया जाए। नए कार्यों के कार्यान्वयन में पिछले अनुभवों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सबसे पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के लिए औपचारिक व्यवस्था की जानी चाहिए, जिसमें आवश्यकता और बहुलता को प्राथमिकता दी जाए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के त्वरित कार्यान्वयन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लक्ष्य 2027 और 2026 के बीच पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष तक की आयु के सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भविष्य सुरक्षित होगा। यह महत्वपूर्ण है कि सिकल सेल की दवाएं हमेशा उपलब्ध रहें। उन्होंने एलोपैथिक उपचार के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग के बारे में जन जागरूकता प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ाने और थकान कम करने में उत्साहजनक प्रारंभिक परिणाम सामने आए हैं। बैठक में राज्यपाल ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करके प्रभावी निगरानी, सार्वजनिक चिकित्सा केंद्रों के प्रबंधन में आदिवासी युवाओं की भागीदारी और विद्यालयों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था पर जोर दिया।
समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के मुख्य सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय मामलों के विभाग के प्रधान सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय मामलों के विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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