गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार छोटे शहरों तक हो—मुख्य सचिव राजस्थान
एन.एस.बाछल, 20 सितम्बर, जयपुर।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं है। राज्य को ऐसा सशक्त और एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें सुलभता, गुणवत्ता, किफायती उपचार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और संस्थागत विश्वास का समावेश हो। प्रत्येक स्वास्थ्य नीति, संस्था, तकनीक और निवेश के केन्द्र में रोगी तथा उसका कल्याण होना चाहिए।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना प्रस्तुत की।
स्वस्थ राजस्थान से साकार होगा विकसित राजस्थान का संकल्प
श्रीनिवास ने कहा कि विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प में सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, सार्वभौमिक टीकाकरण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का विस्तार, आयुष्मान आरोग्य केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग राज्य की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और चिकित्सा महाविद्यालयों को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उचित परामर्श और बेहतर रेफरल व्यवस्था के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रमुख स्वास्थ्य परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, रिक्त पदों को भरने और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
छोटे शहरों तक पहुंचें उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं—
मुख्य सचिव ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार जयपुर और बड़े शहरों से आगे क्षेत्रीय केन्द्रों तथा छोटे शहरों तक किया जाना चाहिए। अस्पताल, जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, आपातकालीन सेवाएं, रेफरल व्यवस्था और डिजिटल संपर्क—इन सभी का समन्वित विकास आवश्यक है। इससे नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर कुशल रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को केवल सरकारी अथवा निजी क्षेत्र द्वारा अलग-अलग पूरा नहीं किया जा सकता। सरकार व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा प्रदान करती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं, नवाचार और प्रबंधकीय दक्षता में महत्वपूर्ण योगदान देता है। दोनों क्षेत्रों को रोगी हित में पूरक भागीदार के रूप में कार्य करना होगा।
क्षमता के साथ गुणवत्ता का भी हो विस्तार—
श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता के साथ होना चाहिए। रोगी सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी परिणाम, चिकित्सकीय उत्तरदायित्व और निरंतर गुणवत्ता सुधार प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनें। स्वास्थ्य संस्थानों को केवल न्यूनतम मानकों की पूर्ति तक सीमित न रहकर सुरक्षा, जवाबदेही और उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भवन और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीशियन और सक्षम स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने के लिए दीर्घकालीन प्रयास आवश्यक हैं। सरकार, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण, संकाय विकास और सतत चिकित्सा शिक्षा के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।
डिजिटल स्वास्थ्य में राजस्थान की उल्लेखनीय प्रगति—
मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें तथा आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या सृजन में चौथे स्थान पर है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण आंकड़ों के सार्थक उपयोग और विभिन्न प्रणालियों के आपसी समन्वय का है। इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से रोगियों को निर्बाध सेवाएं, चिकित्सकों को बेहतर जानकारी तथा सरकार को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सकीय और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकती है, लेकिन मानवीय निगरानी, रोगी सुरक्षा और जवाबदेही सदैव सर्वोपरि रहेंगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर संपर्क सुविधाओं, उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, आतिथ्य क्षेत्र और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में उत्तर एवं पश्चिम भारत के प्रमुख स्वास्थ्य तथा चिकित्सा पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित होने की व्यापक संभावनाएं हैं। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
समापन सत्र में नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के एमेरिटस चेयरपर्सन डॉ. एम.एल. स्वर्णकार, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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