16वें वित्त आयोग के सदस्यों ने राखीगढ़ी में 6000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता का अवलोकन किया
चंडीगढ़, 29 अप्रैल (अभी) - 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया और अन्य सदस्यों ने मंगलवार को दुनिया की सबसे पुरानी हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी धरोहर राखीगढ़ी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 6000 साल पुरानी सभ्यता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने टीलों का दौरा किया और खुदाई के दौरान मिले अवशेषों को भी देखा। इसके साथ ही उन्होंने खुदाई के दौरान मिले अवशेषों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री और विभाग की उपनिदेशक डॉ. बनानी भट्टाचार्य ने आयोग को खुदाई के दौरान मिले अवशेषों के बारे में विस्तार से बताया।
आयोग को जानकारी देते हुए बताया गया कि खुदाई के दौरान मिले अवशेष उस समय के लोगों की जीवनशैली को बयां कर रहे हैं। उस समय कच्ची और पक्की ईंटों से बने बड़े-बड़े घर होते थे और लोग मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करते थे। बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने होते थे। महिलाएं मिट्टी के आभूषणों से अपना श्रृंगार करती थीं। खुदाई के दौरान मिले मिट्टी के औजार और श्रृंगार तथा दीवारों पर बनी पेंटिंग इस बात की गवाह हैं कि हड़प्पा सभ्यता के दौरान लोग बहुत कुशल थे और एक तरह से कौशल विकास का अभ्यास करते थे।
यह भी बताया गया कि यहां पर बहुत विकसित शहर हुआ करता था, जिसमें व्यवस्थित तरीके से सड़कें और बीच के रास्ते बने हुए थे। टीला नंबर एक की खुदाई के दौरान पता चला कि उस समय पत्थरों से मनके बनाए जाते थे, जिनका उत्पादन प्रमुखता से होता था। टीला नंबर दो की खुदाई के दौरान पता चला कि शहर में घरों की सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी थी। घर में गार्ड रूम भी थे। शहर में अलग बाजार और अलग आवासीय क्षेत्र था। पानी की निकासी के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था थी। खुदाई में पता चला कि उस समय हाथी दांत की वस्तुएं भी इस्तेमाल में थीं। टीला नंबर 6 के बारे में भी जानकारी दी गई जहां दीवारों पर मिट्टी के प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया था।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री अनीश यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।