बेटियों की किलकारी से गूंजा नागरिक अस्पताल: अम्बाला छावनी में मई महीने में लड़कों के मुकाबले ज्यादा जन्मीं लड़कियां
जे कुमार अम्बाला छावनी, 3 जून 2026 : अम्बाला छावनी के नागरिक अस्पताल के प्रसूति विभाग (मेटरनिटी विंग) में मई महीने के दौरान बेटियों की जबरदस्त किलकारी गूंजी है। आंकड़ों के मुताबिक, मई माह में अस्पताल में नवजात लड़कों की तुलना में लड़कियों (बेटियों) ने अधिक संख्या में जन्म लिया है, जो क्षेत्र में सुधरते लिंगानुपात (सेक्स रेशियो) और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की जमीनी सफलता को दर्शाता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने साझा किए आंकड़े : नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉक्टर पूजा पैंटल ने जानकारी दी कि अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को प्रसूति विभाग में हर प्रकार की आधुनिक और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं चौबीसों घंटे मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के बेहतरीन प्रयासों के चलते सुरक्षित प्रसव की दर में लगातार इजाफा हो रहा है, और इस बार बेटियों के जन्म का आंकड़ा लड़कों से आगे निकल गया है।
वहीं, अस्पताल की एसएमओ डॉक्टर रचना बंसल ने प्रसूति विभाग की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अस्पताल का गायनी वार्ड पूरी तरह सुसज्जित है, जहाँ सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के साथ-साथ जटिल परिस्थितियों में सिजेरियन ऑपरेशन (एलएससीएस) भी बेहद कुशलता के साथ किए जाते हैं।
गर्भवती महिलाओं को मिल रही है 100 प्रतिदिन की विशेष डाइट
एस एम ओ डॉक्टर रचना बंसल ने सरकार द्वारा दी जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया सरकार के नियमों के अनुसार, नागरिक अस्पताल में प्रत्येक डिलीवरी (प्रसव) के बाद जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गर्भवती महिला को ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से विशेष पौष्टिक डाइट (खुराक) दी जाती है। यह निशुल्क डाइट महिला को अस्पताल में रहने के दौरान तब तक लगातार दी जाती है, जब तक कि डॉक्टर द्वारा उसे अस्पताल से पूरी तरह डिस्चार्ज (छुट्टी) नहीं कर दिया जाता।"
सुविधाओं के चलते बढ़ा सरकारी अस्पताल पर विश्वास
अकादमिक और ढांचागत सुधारों के बाद अम्बाला छावनी का यह नागरिक अस्पताल अब क्षेत्रीय स्तर पर प्रसव के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यहाँ मिलने वाली निशुल्क दवाइयां, मुफ्त टेस्ट, नवजात शिशुओं के लिए विशेष नर्सरी (SNCU) और सरकार की वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं के चलते अब गर्भवती महिलाओं के परिजन निजी अस्पतालों के महंगे इलाज के बजाय सरकारी अस्पताल पर सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। मई महीने के ये उत्साहजनक आंकड़े न केवल स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी को दर्शाते हैं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति बदलती सकारात्मक सोच का भी एक बड़ा प्रमाण हैं।
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