01/08/26

देश की एकता, अखण्‍डता, स्‍वतन्‍त्रता व संविधान की रक्षा युवाओं की जिम्‍मेदारी-राजस्थान विधान सभा अध्‍यक्ष

एन.एस.बाछल, 01 अगस्त, जयपुर।

राजस्थान विधान सभा अध्‍यक्ष  वासुदेव देवनानी ने उदयपुर के मोहन लाल सुखाडिया विश्‍वविद्यालय द्वारा आयोजित युवा एवं आन्‍तरिक सुरक्षा विषयक मोहन लाल सुखाडिया स्‍मृति व्‍याख्‍यान माला का विधान सभा से वर्चुअल शुभारम्‍भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा है कि भारत राष्‍ट्र महान है। इसकी एकता, अखण्‍डता, स्‍वतन्‍त्रता व संविधान की रक्षा की जिम्‍मेदारी युवाओं की है। युवा देश का भविष्‍य के साथ वर्तमान भी है। युवाओं का सही दिशा में चलना राष्‍ट्र की आन्‍तरिक सुरक्षा के लिए आवश्‍यक है। 

देवनानी ने कहा कि बदलते दौर में राष्‍ट्र की बाहरी सुरक्षा के साथ आन्‍तरिक सुरक्षा अधिक चुनौतिपूर्ण बनती जा रही है। मेरा देश कमजोर न हो, यह भाव सभी युवाओं के मन, मस्तिष्‍क में होना चाहिए।

देवनानी ने पूर्व मुख्‍यमंत्री स्‍व. सुखाडिया की जयन्‍ती पर उन्‍हें नमन करते हुए कहा कि वे राजस्‍थान के शिल्‍पी थे। लम्‍बे समय तक वे राज्‍य के मुख्‍यमंत्री रहे। वासुदेव देवनानी ने युवा एवं आन्‍तरिक सुरक्षा विषय को वर्तमान सन्‍दर्भ में सामयिक और महत्‍वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान में युवाओं को साइबर सुरक्षा के योद्धा बनने की आवश्‍यकता है।

 वासुदेव देवनानी ने कहा कि युवा यदि सही दिशा में चलता है तो राष्‍ट्र को शिखर तक ले जा सकता है। वही युवा भ्रम, भटकाव, असन्‍तोष, नकारात्‍मकता और विखण्‍डन के जाल में फंस जाए तो युवा शक्ति राष्‍ट्र के लिए चुनौती बन जाती है। उन्‍होंने कहा कि यदि युवा सजग है, उत्‍तरदायी है, समाज में विश्‍वास है तो आन्‍तरिक सुरक्षा अपने आप मजबूत होती जाती है। वासुदेव देवनानी ने कहा बदलते दौर में खतरा विचारों के प्रदूषण से है। डेटा के दुरूपयोग से राष्‍ट्र को खतरा है। साथ ही डिजिटल मंचों पर चलने वाले मनोवैज्ञानिक युद्ध भी आन्‍तरिक सुरक्षा के लिए चुनौती है। आन्‍तरिक सुरक्षा की लडाई अब सीमा पर नहीं लोगों के मन, मस्तिष्‍क और मंच पर लडी जा रही है। इस लडाई में युवा ही सबसे आगे की पंक्ति में खडा है।

वासुदेव  देवनानी ने कहा कि युवा विवेकशील है तो सुरक्षा का प्रहरी बन सकता है। यदि युवा संवेदनशील है तो वह समाज में विश्‍वास का सेतु बन सकता है और यदि वह तकनीक समर्थ है तो साइबर सुरक्षा का योद्धा बन सकता है। युवाओं को राष्‍ट्र की मर्यादा का रक्षक बनने वाले ऐसे संस्‍कार देने में विश्‍वविद्यालयों की भूमिका अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण होती है। इस डिजिटल दौर में युवाओं को अधिक सावधान रहना होगा। अन्‍य देशों के राजनैतिक स्‍वार्थ, संकीर्ण लाभ के इस्‍तेमाल से युवाओं को बचना होगा। हर युवा को यह समझना होगा कि मोबाइल स्क्रीन पर आई हुई हर बात सत्‍य नहीं होती है। विवेक और संस्‍कारों से राष्‍ट्र को अ‍टल बनाना होगा। विदेशी सडयंत्रों, विघटनकारी ताकतों से समाज और राष्‍ट्र को बचाना होगा।

 समारोह में विश्‍वविद्यालय के कुलगुरू कैलाश डागा ने स्‍वागत उद्बोधन और व्‍याख्‍यान माला की जानकारी दी। व्‍याख्‍यान माला को जे. नन्‍द कुमार और रमन कुमार सूद ने भी सम्‍बोधित किया। समारोह में प्राध्‍यापकगण, अधिकारीगण और छात्र- छात्राएं मौजूद थे।  

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