27/09/25

साहित्यकार समाज सुधार में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं, इसलिए उन्हें आगे आना जरूरी है : ऊर्जा मंत्री अनिल विज

कवित्री अनुपमा आर्य ने अपने काव्य संग्रह “रंगरेज मेरे अल्फाजों के” माध्यम से बहुत बातों को एक शब्द में कहा है और एक शब्द से बहुत कुछ कहा है : मंत्री अनिल विज

कविता वहीं लिख सकता है जिसमें भावना का भंडार हो, भावनावहीन आदमी कविता नहीं लिख सकता : अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आज कवित्री अनुपमा आर्य के काव्यसंग्रह “रंगरेज मेरे अल्फाजों के” का विमोचन किया

चंडीगढ़/अम्बाला, 27 सितम्बर - हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि किसी भी सरकार के नियम समाज को नहीं बदल सकते आज तक जितने भी बदलाव हुए वह लोगों ने किए। इसके लिए हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि समाज की जो समस्याएं है वह हल की जा सके और साहित्यकार समाज सुधार में बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। ईंट सीमेंट की इमारतों से शहर नहीं बसते। सामाजिक तानाबाना जरूरी है। वह साहित्यकारों से आह्वान करते हैं कि वह समाज सुधार के लिए आगे आए और लोगों को ठीक रास्ते पर लेकर जाए। आदमी मनुष्य तो जन्म से बन जाता है, मगर मनुष्य से इंसान बनना जरूरी है।

श्री विज आज अम्बाला छावनी के सेंट्रल फीनिक्स क्लब में प्राचार्य एवं कवित्री अनुपमा आर्य के काव्यसंग्रह “रंगरेज मेरे अल्फाजों के” का विमोचन के उपरांत लोगों को संबोधित कर रहे थे। यह काव्यसंग्रह कैबिनेट मंत्री अनिल विज और अनुपमा आर्य के परिवार पर लिखी गई है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि आज अनुपमा आर्य ने काव्य संग्रह का विमोचन किया है और इसका जो शीर्षक है उसे साहित्यकार ने बहुत सारी बातों को एक शब्द में कहा है और एक शब्द से बहुत कुछ कहा है।

उन्होंने कहा कि काव्यसंग्रह के माध्यम से अनुपमा आर्य से बहुत कुछ बाते कहने की कोशिश की। अनुपमा के पिता किशनलाल वर्मा एक बेहतरीन मंच संचालक थे।

”निकले थे कहां जाने के लिए, पहुंचे कहां मालूम नहीं, खुद अपने भटकते कदमों को मंजिला का मालूम नहीं”

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि उन्होंने कभी भी राजनीति में आने के बारे नहीं सोचा था और उन्हें केवल समाज कल्याण के कार्य करने का शोक था। उन्होंने कल्याण भारती व अन्य संस्थाएं बनाई जिसमें वह सक्रिय तौर पर शामिल होते थे। उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। मगर वह ऐसी लोगों की संगत में रहे जिस कारण उन्हें शुरू से ही काम करने का शोक था। मेरे साथ वहीं हुआ …”निकले थे कहां जाने के लिए, पहुंचे कहां मालूम नहीं, खुद अपने भटकते कदमों को मंजिला का मालूम नहीं”।

काम करने वाले की सराहना आवश्य होनी चाहिए : मंत्री अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अनुपमा आर्य जी ने जो कविताएं उनपर लिखी हैं यह उनके लिए एक खुराक की तरह हैं। एक आदमी यदि काम करता जा रहा है और कोई उसको सराह नहीं रहा तो नकारात्मकता हावी हो जाती है। मगर अनुपमा जैसी कवित्री कविताओं के माध्यम से सकारात्मकता का जोश भर देती हैं। यदि कोई ठीक काम कर रहा है तो उसकी सराहना अवश्य होनी चाहिए। उन्हें जो भी विभाग मिले उन्होंने इसी सिद्धांत से काम किया कि गलत कार्य करने वाले को सजा देते हैं तो अच्छा काम करने वाले की पीठ भी थपथपाते हैं। हम सभी लोगों को काम करना सिखाते हैं।

कविता वहीं लिख सकता है जिसमें भावना का भंडार हो : अनिल विज

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि कविताएं फूलों पर लिखी जाती है कांटों पर नहीं और वह जीवन में उबड़-खाबड़ रास्तों से कांटों के जंगल से निकले है जोकि वह खुद जानते हैं। इसलिए उनके जैसे व्यक्ति पर कविता लिखना कठिन कार्य रहा होगा। उन्होंने कहा कविता वहीं लिख सकता है जिसमें भावना का भंडार हो, भावनावहीन आदमी कविता नहीं लिख सकता। पहले साहित्य का लोग पढ़ा करते थे, मगर आज जीवन रूखा हो गया है। सकारात्मकता व नकारात्मकता जीवन में दो तत्व है, मगर जीवन पर नकारात्मकता हावी होती जा रही है। टीवी पर आज नकारात्मकता ही दिखाई देती है। यदि सकारात्मकता बढ़ती है तो आदमी परमानंद में रहता है और इसमें साहित्य का तड़का लग जाए बहुत अच्छा होगा।

कवित्री अनुपमा आर्य ने काव्यसंग्रह बारे जानकारी दी

इस अवसर पर आर्य गर्ल्स कालेज की प्राचार्य व कवित्री डा. अनुपमा आर्य ने मुख्य अतिथि अनिल विज का स्वागत करते हुए कहा कि जो उन्होंने पुस्तक लिखी है उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने पुस्तक के माध्यम से अपने पिता कृष्ण लाल वर्मा, बेटे के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री अनिल विज के जीवन आधारित वर्णन इस पुस्तक में प्रदर्शित किया है। इसके साथ-साथ अन्य कवियों ने भी डा. अनुपमा द्वारा रचित पुस्तक की सराहना की।

शायर बिलाल सहारनपुरी ने मंत्री अनिल विज की तारीफ में कविता पढ़ी

इस अवसर पर विशेष रूप से आए शायर बिलाल सहारनपुरी ने मंत्री अनिल विज की शान में कविता भी पढ़ी। उन्होंने कहा मंत्री अनिल विज की कार्यप्रणाली को सराहा और सभी को इससे प्रेरणा लेने को कहा।

इस अवसर पर गुलशन राय, सतीश चंद पराशर, संजीव वालिया, संजीव सोनी, इंद्रदेव गुप्ता, ए.डी. गांधी, डा. अशोक, डा. हुकम, प्रेम महिन्द्रु जी, सीमा महिन्द्रु, शोभा धवन, सविता बजाज, डा. नीरज पराशर, सीमा वालिया, दीपक भसीन, डा. जोगिन्द्र, मनजीत, एम.के.दत्ता, डा. के.डी शर्मा, डा. कामदेव झा, सुभाष बंसल, राम बाबु यादव, बी.एस. बिन्द्रा, रवि बुद्धिराजा के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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