हरियाणा में आज पल्स पोलियो 2026 अभियान की शुरुआत हुई
अभिकान्त, 28 जून हरियाणा : हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत व हरियाणा को वर्ष 2014 से मिला 'पोलियो मुक्त' दर्जा स्वास्थ्य विभाग, अग्रणी कार्यकर्ताओं और आम जनता के साझा प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने प्रदेश के सभी माता-पिता से अपील की कि वे अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रह सकें। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य का एक भी बच्चा इस सुरक्षा चक्र से छूटना नहीं चाहिए।
हरियाणा को पोलियो मुक्त बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराते हुए राज्य सरकार ने आज से सभी जिलों में राष्ट्रीय प्रतिरक्षण दिवस (NID) के तहत पल्स पोलियो 2026 अभियान की शुरुआत कर दी है। अभियान के पहले दिन प्रदेश भर में विशेष बूथ गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन विभिन्न जिलों में मंत्रियों, विधायकों, उपायुक्तों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया।
इसी कड़ी में हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने जींद जिले में इस अभियान की शुरुआत की। वहीं, भिवानी में विधायक घनश्याम सर्राफ, फरीदाबाद में मूलचंद शर्मा, करनाल में जगमोहन आनंद, महेंद्रगढ़ में ओ.पी. यादव, रेवाड़ी में लक्ष्मण सिंह, सोनीपत में निखिल मदान और यमुनानगर में घनश्याम दास अरोड़ा ने बूथों का उद्घाटन कर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। रोहतक में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर और कुरुक्षेत्र में पूर्व विधायक सुभाष सुधा ने इस अभियान का शुभारंभ किया, जबकि गुड़गांव में पार्षद सोनिया यादव व सतपाल और झज्जर में एमसी अनु रानी ने मोर्चा संभाला। पलवल जिले में एनएचएम हरियाणा के निदेशक (एमसीएच) ने इस गतिविधि की शुरुआत की।
28 से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान राज्य के लगभग 35.50 लाख बच्चों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के पहले ही दिन 5 वर्ष तक की आयु के लगभग 20 लाख (56 प्रतिशत) बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जा चुकी हैं। इस महाअभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य भर में लगभग 17,000 बूथ स्थापित किए गए हैं, जिन पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को मिलाकर कुल 34,000 स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा, ईंट-भट्टों, निर्माण स्थलों, पोल्ट्री फार्मों और झुग्गी-झोपड़ियों जैसे दूरदराज या कम पहुंच वाले क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए लगभग 1500 मोबाइल टीमें भी मुस्तैद की गई हैं।
अभियान की कड़े स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में लगभग 3400 फील्ड सुपरवाइजर और जिला स्तरीय अधिकारियों ने गतिविधियों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही इम्यूनाइजेशन फील्ड वॉलिंटियर्स और डब्ल्यूएचओ (NPSP-WHO) के स्वतंत्र मॉनिटर्स ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान की देखरेख के लिए 16 राज्य पर्यवेक्षकों को भी तैनात किया गया है। इस जमीनी कवायद से पहले प्रिंट और डिजिटल मीडिया, माइकिंग (लाउडस्पीकर से मुनादी) और अन्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से जनता को जागरूक किया गया था।
जो बच्चे आज यानी 28 जून को बूथ पर आकर दवा नहीं ले पाए हैं, उनको स्वास्थ्य विभाग की टीमें 29 और 30 जून को घर-घर जाकर और मोबाइल टीमों के जरिए हाई-रिस्क वाले क्षेत्रों, जैसे झुग्गी-झोपड़ियों, ईंट-भट्टों और निर्माण स्थलों पर प्रवासी आबादी के बच्चों को कवर करेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, अन्य संबंधित विभागों और जनता के लगातार प्रयासों के चलते भारत और हरियाणा को साल 2014 में ही पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बार इस अभियान को पूरी मुस्तैदी से चलाकर देश के इस 'पोलियो मुक्त' दर्जे को कायम रखना है, जिसके लिए आम जनता से भी सक्रिय सहयोग की अपील की है।
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